नई दिल्ली, 12 अगस्त।
राज्यसभा में बुधवार को केरल से सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास को लेकर कथित ‘लुंगीवाला’ टिप्पणी पर हंगामा हो गया। ब्रिटास ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने सदन में उनके लिए इस शब्द का अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल किया। उन्होंने मामले में सभापति को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दिया है।
राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने हंगामे के बीच सभी सदस्यों से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन में बोल रहे सदस्यों के बीच टोका-टोकी के दौरान असभ्य और गरिमा के खिलाफ टिप्पणियों के मामले उनके संज्ञान में आए हैं।
सभापति ने कहा कि सदस्यों को अपने साथी सांसदों की भावनाओं और संवेदनाओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति विविधताओं से भरी है और किसी सदस्य की सांस्कृतिक परंपरा या क्षेत्रीय पहचान का अनादर नहीं किया जाना चाहिए।
सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि इस मामले में केवल एक पक्ष को सुनकर फैसला करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सुष्मिता देव को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, जिससे सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष निर्णय लिया जा सके।
ब्रिटास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब वह सदन में बोल रहे थे, तब उनके लिए ‘लुंगीवाला’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने धोती पहनी हुई थी और उन्हें मलयाली तथा दक्षिण भारतीय होने पर गर्व है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक पहनावा उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। उनके अनुसार, किसी की क्षेत्रीय या सांस्कृतिक पहचान का इस्तेमाल उसे नीचा दिखाने या अपमानित करने के लिए किया जाना स्वीकार्य नहीं है।
ब्रिटास ने कहा कि सदन को मामले में उचित रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि संबंधित सांसद के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उनके मन में किसी के प्रति दुर्भावना नहीं है।














