नई दिल्ली, 12 अगस्त।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरे लोगों के जीवन के संघर्षों से सीख लेने का आग्रह किया। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन समारोह में उन्होंने कहा कि रील और सामाजिक माध्यमों के दौर में युवाओं में शॉर्टकट की प्रवृत्ति बढ़ रही है, लेकिन जीवन में सफलता मेहनत और संघर्ष से मिलती है।
मोदी ने कहा कि आत्मकथा केवल किसी व्यक्ति की कहानी नहीं होती, बल्कि उसके दौर के इतिहास और अनुभवों को भी समझने का अवसर देती है। उन्होंने कोविंद की जीवन यात्रा को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया और कहा कि उनके संघर्षों से मिली सफलता भारतीय गणतंत्र और लोकतंत्र की उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री ने कोविंद के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उन्हें उनके साथ निकटता से काम करने और राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने कोविंद की सादगी, आत्मीयता और विनम्रता को उनकी विशेष पहचान बताया।
मोदी ने कहा कि कानपुर देहात के सामान्य परिवार में जन्मे कोविंद ने बचपन में कठिन परिस्थितियों का सामना किया। घर में आग लगने की घटना में उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। इसके बावजूद वह परिस्थितियों से टूटे नहीं। उनके पिता ने परिवार संभाला और संस्कार दिए, वहीं पड़ोस की एक महिला ने भी उनके पालन-पोषण में सहयोग किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविंद ने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया और संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। मेहनत और क्षमता के बल पर उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनकी सादगी और विनम्रता कायम रही।
उन्होंने राष्ट्रपति भवन में कोविंद के आत्मीय व्यवहार का भी उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि प्रोटोकॉल से अलग वह कई बार प्रधानमंत्री को विदा करने के लिए गाड़ी तक आते थे। राष्ट्रपति बनने के बाद गांव परौंख पहुंचने पर कोविंद ने अपने गुरुओं के पैर छुए और गांव की मिट्टी को नमन किया।
मोदी ने कहा कि कोविंद का जीवन उस भारत की तस्वीर पेश करता है, जहां गरीब और वंचित व्यक्ति भी मेहनत और योग्यता के आधार पर सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के विचारों का उल्लेख करते हुए समान अवसर वाले भारत के सपने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से मुश्किलों के सामने हार नहीं मानने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो चुनौतियों से घबराने के बजाय मेहनत और संकल्प के साथ आगे बढ़ें। उनके अनुसार, कोविंद की आत्मकथा युवाओं में यही आत्मविश्वास पैदा कर सकती है।
मोदी ने बताया कि कोविंद ने अपनी आत्मकथा में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के साथ काम करने के अनुभव और उनसे मिली सीख का भी उल्लेख किया है। उन्होंने राजनीति और समाजसेवा के जरिए सांसद, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्ति के बाद भी कोविंद सक्रिय हैं और एक देश, एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से देशवासियों, विशेषकर युवाओं को सीख लेनी चाहिए।
मोदी ने कहा कि सक्रिय सार्वजनिक जीवन के साथ आत्मकथा लिखना आसान नहीं है, लेकिन कोविंद ने अपने अनुभवों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया है। पुस्तक सामान्य परिवारों के संघर्ष, ईमानदारी और जीवन-मूल्यों से व्यक्तित्व निर्माण को समझने का अवसर देती है।
उन्होंने युवाओं को शॉर्टकट से बचने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसी राह व्यक्ति को छोटा कर सकती है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपनी पसंद की आत्मकथाएं पढ़ने का आग्रह किया और कहा कि इनके जरिए इतिहास को उसे जी चुके लोगों के अनुभवों से समझने का अवसर मिलता है।















