नई दिल्ली, 12 अगस्त।
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बच्चों और युवाओं में बढ़ते अवैध ई-सिगरेट तथा वेपिंग के चलन पर गंभीर चिंता जताई है। संसद में विशेष उल्लेख के दौरान उन्होंने कहा कि आकर्षक रंगों और डिजाइनों वाले वेप उपकरण, आसानी से छिपाए जा सकने वाली बनावट और तरह-तरह के स्वाद युवाओं को निकोटीन की लत की ओर खींच रहे हैं।
मालीवाल ने कहा कि कई वेप उपकरण देखने में छोटे यूएसबी उपकरण जैसे लगते हैं। पारंपरिक सिगरेट की तुलना में इनमें धुआं और तेज गंध नहीं होती। इसके चलते अभिभावकों के लिए बच्चों के वेपिंग करने का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने वेपिंग से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का जिक्र करते हुए कहा कि वेप से निकलने वाले एरोसोल में निकोटीन, भारी धातुएं और फॉर्मल्डिहाइड जैसे रसायन हो सकते हैं। मिंट, कैंडी और आम जैसे स्वाद भी कम उम्र के बच्चों और युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।
मालीवाल ने कहा कि वेपिंग में धुआं या दुर्गंध दिखाई नहीं देने के कारण माता-पिता को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती। उनका कहना है कि इसके बावजूद बच्चे निकोटीन की निर्भरता की ओर बढ़ सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि कुछ वेप पॉड में मौजूद निकोटीन की मात्रा 20 सिगरेट वाले एक पूरे पैकेट के बराबर हो सकती है। मालीवाल ने चेताया कि किशोरावस्था में निकोटीन का सेवन मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है और लंबे समय तक इसकी लत लगने का खतरा बढ़ सकता है।
मालीवाल ने भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून का उल्लेख करते हुए सरकार के कदम की सराहना की। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रतिबंध के बाद भी वेप की अवैध बिक्री ग्रे-मार्केट और सोशल मीडिया के माध्यम से जारी है। उनका आरोप है कि इन माध्यमों के जरिए प्रतिबंधित उत्पाद बच्चों और युवाओं तक आसानी से पहुंच रहे हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से राज्यों के साथ समन्वय कर अवैध विक्रेताओं और ऑनलाइन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की मांग की। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई। उन्होंने अभिभावकों को वेपिंग उपकरणों की पहचान और उनसे जुड़े खतरों की जानकारी देने की भी अपील की।
मालीवाल ने कहा कि किसी उत्पाद पर कानून के जरिए रोक लगाई जा सकती है, लेकिन लत से मुकाबले के लिए जागरूकता जरूरी है। उन्होंने सरकार और समाज से समय रहते कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि कार्रवाई में देरी होने पर एक पूरी पीढ़ी के निकोटीन की गिरफ्त में आने का खतरा बढ़ सकता है।















