धमतरी, 12 अगस्त।
स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में होने वाले समारोह में छत्तीसगढ़ की आदिवासी लोकसंस्कृति की खास झलक देखने को मिलेगी। धमतरी के नगरी विकासखंड के सरईटोला (गुडरापार) गांव का जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल पारंपरिक गुट्टा मांदर नृत्य की प्रस्तुति देगा।
ग्रामीण क्षेत्र के कलाकारों को देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलना धमतरी और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। सरईटोला का यह दल अपनी गढ़वा नृत्य शैली, गुट्टा मांदर की ऊर्जावान थाप, पारंपरिक परिधान और लोक वाद्यों के लिए पहचाना जाता है।
दल की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के लोकजीवन, परंपराओं, उत्सवों और सामुदायिक संस्कृति की झलक दिखाई देती है। मांदर की थाप, पारंपरिक गीत और सामूहिक नृत्य इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। रंगीन वेशभूषा और पारंपरिक आभूषण प्रस्तुति की सांस्कृतिक छटा को और निखारते हैं।
यह लोकनृत्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोक परंपराओं और सामुदायिक एकता को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। फसल कटाई, उत्सव, मेले और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक अवसरों पर इसका आयोजन किया जाता है।
दल के सचिव रूपराय नेताम ने बताया कि सांस्कृतिक भवन, नागपुर ने दल की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों और पारंपरिक कला की विशेषता को देखते हुए उसे स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देने के लिए चुना है। उन्होंने इसे देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान में छत्तीसगढ़ की लोककला पेश करने का गौरवपूर्ण अवसर बताया।
राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति के लिए सरईटोला के रतन लाल निषाद, सुरेंद्र सोरी, हेमंत सोरी, सुलोचना सोरी और मधु नेताम नई दिल्ली रवाना होंगे। ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंच रहे इन कलाकारों की उपलब्धि छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला की मौलिकता और जीवंतता को दर्शाती है।
कलेक्टर ने कलाकारों को दी शुभकामनाएंचार अगस्त को जनदर्शन के दौरान गढ़िया बाबा आदिवासी लोक नृत्य सेवा समिति, सरईटोला के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने 15 अगस्त को नई दिल्ली में होने वाले स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में धमतरी की लोकसंस्कृति का प्रतिनिधित्व करने की जानकारी दी थी।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय मंच पर जिले की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी कला का प्रदर्शन पूरे धमतरी के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने के साथ युवाओं को अपनी लोक परंपराओं से जोड़ने की प्रेरणा भी देगी। राष्ट्रपति भवन में गूंजने वाली मांदर की थाप धमतरी की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।















