मुंबई, 13 अगस्त।
आसमान में उड़ने वाले विमान को सबसे सुरक्षित सफर माना जाता है, क्योंकि पायलट के हाथ में सैकड़ों यात्रियों की जान होती है। लेकिन जब यही पायलट नशे में धुत होकर कॉकपिट में बैठ जाए तो सवाल उठता है कि हम किस पर भरोसा करें। रिपोर्ट्स के अनुसार, उड़ान से पहले हुए ड्रग टेस्ट में पायलट पॉजिटिव पाया गया, दूसरे डोप टेस्ट में भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यह सिस्टम की नाकामी है।
उड़ान से पहले पायलट और क्रू का मेडिकल और ड्रग टेस्ट अनिवार्य है। लेकिन अगर इस टेस्ट को भी कोई गंभीरता से नहीं लेगा तो फिर नियम बनाने का फायदा क्या? डीजीसीए और एयर इंडिया प्रबंधन की जवाबदेही पर है कि ऐसा पायलट ड्यूटी पर कैसे पहुंच गया, जिसने नशा किया था। क्या प्री-फ्लाइट चेक में ढिलाई बरती गई या ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा था?
इस घटना के बाद बड़ा सवाल यात्रियों के मन में है कि अगर पायलट ही नशे में होगा तो विमान कौन संभालेगा? तीन सौ फीट की ऊंचाई पर एक सेकंड की चूक भी तबाही ला सकती है। ऐसे में नशे में धुत पायलट से उम्मीद करना कि वह आपात स्थिति में सही फैसला लेगा, मजाक है। नई एयरलाइंस, नए रूट और सस्ते किराए से हवाई सफर आम आदमी की पहुंच में आया है। इसी के साथ सुरक्षा और अनुशासन को भी प्राथमिकता देनी होगी।
भारत सरकार और एविएशन मंत्रालय को इस मामले को गंभीरता से लेना होगा। सस्पेंशन और जांच के नाम पर खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। जरूरत सिस्टम की ऑडिट की। हर एयरलाइन में ड्रग और अल्कोहल टेस्ट की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है, इसकी जांच होनी चाहिए। क्या टेस्ट समय पर होते हैं? क्या रिपोर्ट में हेरफेर की गुंजाइश है? और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होती है? इन सवालों के जवाब जनता को चाहिए।
एयर इंडिया जैसी राष्ट्रीय धरोहर मानी जाने वाली एयरलाइन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। टाटा समूह के हाथ में जाने के बाद एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने की कोशिश हो रही है, लेकिन अगर इसी तरह की खबरें आती रहेंगी तो यात्रियों का भरोसा कैसे जीता जाएगा? इसलिए सुरक्षा और विश्वसनीयता ही किसी एयरलाइन की सबसे बड़ी पूंजी है।
आम नागरिक टिकट लेकर विमान में बैठता है और मानता है कि सब ठीक होगा। सरकार को इस मामले की हाई लेवल जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और नए नियम बनाए जाएं। साथ ही हर तीन महीने में सभी पायलटों का ड्रग टेस्ट अनिवार्य किया जाए।
आसमान में कोई दूसरा मौका नहीं देता। वहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। पायलट भगवान नहीं होता, लेकिन उसकी जिम्मेदारी भगवान से कम भी नहीं होती। इसलिए हे राम, अगर पायलट ही नशे में विमान उड़ाएंगे तो फिर यात्रियों को कौन बचाएगा? इस सवाल का जवाब सरकार, एविएशन विभाग और एयरलाइंस को मिलकर देना होगा, वरना अगली खबर किसी हादसे की होगी और तब पछताने के सिवा हमारे पास कुछ नहीं बचेगा।














