गुवाहाटी, 13 अगस्त।
असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी कम होने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता राहत, सेवा और पुनर्स्थापन के काम में जुटे हुए हैं। 3 और 4 अगस्त को कार्यकर्ताओं ने प्रभावित जिलों का दौरा कर परिवारों से संपर्क किया और तत्काल राहत के साथ आगे की पुनर्वास जरूरतों का आकलन किया।
नगालैंड की पहाड़ियों में हुई तेज बारिश, भूस्खलन और तेज जलप्रवाह के कारण ऊपरी असम में गंभीर बाढ़ की स्थिति बनी थी। इसका असर शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में देखने को मिला। इनमें शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित रहा, वहीं चराईदेव और जोरहाट में भी व्यापक नुकसान हुआ।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आपदा में अब तक 104 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। हजारों परिवार और चार लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। पानी उतरने के बाद भी घरों, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
इस स्थिति में संघ के स्वयंसेवकों और विभिन्न संगठनों ने स्थानीय समाज के सहयोग से राहत एवं पुनर्वास अभियान चलाया। प्रभावितों तक भोजन, कपड़े, बिस्तर, दवाइयां और घरेलू जरूरत का सामान पहुंचाया गया। इसके साथ चिकित्सा सेवा, स्वच्छता और विसंक्रमण, श्रमदान, परिवारों की सहायता, कृषि पुनर्स्थापन तथा विद्यालयों, नामघरों और घरों की सफाई का काम भी किया गया।
क्षेत्रीय आकलन में खाद्य सामग्री, कपड़े, बिस्तर, बर्तन, शिशु आहार, पशु आहार, दवाइयां, पेयजल, वाटर फिल्टर और क्लोरीन टैबलेट समेत अन्य पुनर्वास सामग्री की जरूरत सामने आई। सेवा भारती पूर्वांचल, एनएमओ असम, एएमओ असम, सु-का-फा अस्पताल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, विद्या भारती, भारत विकास परिषद, संस्कृत भारती, राष्ट्र सेविका समिति/उत्कर्षिणी सेवा न्यास, लघु उद्योग भारती, भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, हेडगेवार स्मारक समिति, मधुकर सेवा न्यास और कल्याण आश्रम सहित विभिन्न संगठनों ने अपने स्तर पर राहत एवं सेवा कार्य किए।
सेवा अभियान शिवसागर जिले के नाजिरा, खेलुवा, शिमलुगुड़ी और शिवसागर नगर के अलावा जोरहाट जिले के सेलेंगहाट, कलियापानी, तिताबर, खंगिया और ढेकगांव में चलाया गया। चराईदेव के दिसांग पानी, पश्चिम अभयापुरी, सोनारी और लकुवा तथा गोलाघाट के पदुमणि, देरगांव और मोरंगी क्षेत्रों में भी प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाई गई।
प्रभावितों को चावल, दाल, आलू, आटा, चीनी, चिउड़ा, मुरमुरा, बिस्कुट, दूध और फल-जूस जैसी खाद्य सामग्री दी गई। आश्रय एवं कपड़ों के लिए गद्दे, चादर, मच्छरदानी, कपड़े, टी-शर्ट, टोपी, चप्पल, गमबूट और मोजे वितरित किए गए। मातृ-शिशु और स्वच्छता से जुड़ी जरूरतों के लिए बेबी फूड, बच्चों के कपड़े, सैनिटरी पैड, ब्लीचिंग पाउडर, मोमबत्ती और मच्छररोधी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
बाढ़ का पानी कम होने के बाद विभिन्न जिलों से आए 1250 स्वयंसेवकों ने श्रमदान और पुनर्स्थापन के कार्यों में हिस्सा लिया। सेवा भारती पूर्वांचल ने खाद्य सामग्री, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, स्वच्छता सामग्री और चिकित्सा संसाधन जुटाकर प्रभावित इलाकों तक पहुंचाए। सामग्री के परिवहन और वितरण के साथ परिवारों की दैनिक जरूरतों का भी ध्यान रखा गया।
गोलाघाट जिले में सेवा भारती पूर्वांचल ने 25 जुलाई को 13 कार्यकर्ताओं के माध्यम से दो गांवों के 200 परिवारों को खाद्य और अन्य सामग्री वितरित की। 2 अगस्त को सबसे अधिक प्रभावित नेपाली खूंटी गांव में आठ अस्थायी शिविर बनाए गए और सफाई के साथ जरूरी सामग्री भी बांटी गई।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने करीब 11 गांवों में राहत एवं सेवा कार्य किया। प्रभावित लोगों को विभिन्न आवश्यक सामग्री और तैयार भोजन देने के साथ मच्छरदानी, बेडशीट तथा कृषि भूमि के लिए धान के पौधे भी वितरित किए गए।
एनएमओ असम और सु-का-फा अस्पताल ने प्रभावित लोगों को चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई। भारतीय किसान संघ ने कृषि और आजीविका बहाली के लिए पशु आहार, धान के पौधे, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई। विद्या भारती ने विद्यालयों के पुनर्स्थापन और विद्यार्थियों की सहायता के लिए आर्थिक मदद तथा नोटबुक उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए।
राष्ट्र सेविका समिति/उत्कर्षिणी सेवा न्यास ने जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव जिलों के करीब 2000 परिवारों तक सहायता पहुंचाई। इसमें 1.12 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी शामिल है। लघु उद्योग भारती, पूर्वोत्तर प्रांत, भारत विकास परिषद, संस्कृत भारती, भारतीय मजदूर संघ और आयुर्वेदिक मेडिकल ऑर्गनाइजेशन समेत अन्य संगठन भी लगातार सेवा कार्य में लगे हैं।
राहत से पुनर्स्थापन और पुनर्वास पर जोर
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सेवा कार्य अभी जारी है। तत्काल राहत के बाद अब पुनर्स्थापन, आजीविका की बहाली और सामान्य जीवन वापस लाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आगे की प्राथमिकताओं में क्षतिग्रस्त घरों की सफाई और मरम्मत, परिवारों का पुनर्वास, विद्यालयों की बहाली, विद्यार्थियों को किताब-कॉपी और शैक्षणिक सामग्री, किसानों को बीज व धान की पौध, पशुओं के लिए चारा, सुरक्षित पेयजल और वाटर फिल्टर उपलब्ध कराना शामिल है।
इसके साथ ब्लीचिंग और फिनाइल से विसंक्रमण, जरूरत के अनुसार चिकित्सा शिविर तथा बिस्तर, बर्तन और घरेलू उपयोग की सामग्री उपलब्ध कराने का काम भी किया जाएगा। सेवा कार्य को बाढ़ का पानी उतरने तक सीमित न रखते हुए प्रभावित परिवारों के दोबारा सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन की ओर लौटने तक जारी रखने का संकल्प जताया गया है।















