राजधानी से लगभग 300 किलोमीटर दूर नर्मदा की सीमाओं को छूने वाले एक जिले में इन दिनों कांवड़ यात्रा की धूम है। धार्मिक आयोजन हैं तो माननीयों की मदद भी स्वाभाविक है। कई क्षेत्रों में मदद लेकर आयोजन किए जा रहे हैं और स्थानीय साहब के पास मदद मांगने वालों की भीड़ लगी है।
साहब भी अपनी तरफ से मददगारों के पास मदद के लिए भेज रहे हैं, लेकिन अब स्थिति यह है कि आयोजनों की भरमार में मदद का धड़ा भर चुका है। जिनसे मदद की उम्मीद थी, वही अब परेशान नजर आ रहे हैं। चर्चा है कि मांगने वालों की लाइन खत्म नहीं हो रही और मददगारों की क्षमता खत्म हो रही है। अब लगता है मदद मांगने वालों को ही मददगारों की मदद करनी पड़ेगी।















