पिछले छह महीनों से साहब ने कार्यभार संभालते ही जनसंवाद की ऐसी परंपरा शुरू कर दी है कि थाना प्रभारियों के लिए हर दिन नया सरप्राइज लेकर आता है। जनसंवाद का कोई पूर्व निर्धारित कार्यक्रम नहीं होता। अचानक तय होता है कि साहब आज फलां थाना क्षेत्र में पहुंचेंगे।
साहब अब तक रोज कहीं न कहीं जनसंवाद कर चुके हैं, लेकिन इसका असर जनता से ज्यादा थाना प्रभारियों के दिलों पर दिखाई दे रहा है। साहब के अचानक पहुंचने की खबर मिलते ही थानों में सफाई से लेकर रिकॉर्ड तक सब कुछ दुरुस्त होने लगता है। अब स्थिति यह है कि थाना प्रभारी सुबह उठकर यह नहीं सोचते कि आज क्या काम करना है, बल्कि यह सोचते हैं- आज साहब कहां पहुंच सकते हैं?















