कनिष्ठ मजे में हैं और वरिष्ठ लाइन में खड़े हैं- पदस्थापना के इंतजार में। पुलिस महकमे में किसी बड़े आदमी का रिश्तेदार होना किसी के लिए वरदान साबित हो रहा है तो किसी के लिए इंतजार की सजा। प्रभारी बनने के लिए निरीक्षक होना प्राथमिकता है, लेकिन एक बड़े साहब के रिश्तेदार अपात्र होने के बाद भी लंबे समय से प्रभारी के रूप में पदस्थापना पाने में सफल बताए जा रहे हैं।
दूसरी ओर पात्र अधिकारी लाइन में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इंतजार इतना लंबा हो गया है कि अब बेचैनी भी बढ़ती जा रही है। महकमे में चर्चा है कि यहां पात्रता से ज्यादा रिश्तेदारी का अनुभव काम आ रहा है, इसलिए पात्र अधिकारी अनुभव लेने के लिए लाइन में ही खड़े हैं।















