अफगानिस्तान, 16 अगस्त।
अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के पांच साल पूरे हो गए हैं। 15 अगस्त 2021 को तालिबान लड़ाके बिना किसी बड़े प्रतिरोध के काबुल में दाखिल हुए थे। इसके कुछ ही दिनों में अफगान सरकार का पतन हो गया और अमेरिका तथा उसके सहयोगी सैनिकों की वापसी पूरी हुई।
उस समय काबुल के हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देश छोड़ने की कोशिश कर रहे हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। कई लोगों ने विमानों तक पहुंचने की कोशिश की। कुछ लोग अमेरिकी सैन्य विमान के साथ भी लटक गए थे और विमान के उड़ान भरने के बाद कम से कम दो लोगों के गिरने की तस्वीरें सामने आई थीं।
तालिबान ने सत्ता संभालने के शुरुआती दौर में लोगों की संपत्ति और जान-माल की सुरक्षा का भरोसा दिया था। महिलाओं और लड़कियों के पहले हासिल अधिकारों को बनाए रखने तथा समावेशी इस्लामी सरकार बनाने का भी वादा किया गया था।
समय के साथ ये वादे कायम नहीं रहे। लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा और महिलाओं को विश्वविद्यालयों से दूर कर दिया गया। इसके बाद महिलाओं के रोजगार, आवागमन और सार्वजनिक जीवन पर भी पाबंदियां बढ़ती गईं।
महिलाओं और लड़कियों को लेकर जारी किए गए सौ से अधिक आदेशों का उल्लेख किया गया है। सर्वेक्षण में शामिल 10 में से सात महिलाओं ने अपनी मानसिक स्थिति खराब या बहुत खराब बताई। आधे से अधिक महिलाओं ने कहा कि वे महीने में केवल एक या दो बार घर से बाहर निकलती हैं।
लगभग तीन-चौथाई महिलाओं ने पुरुष अभिभावक के बिना घर से बाहर निकलने को असुरक्षित बताया। अफगानिस्तान में केवल सात प्रतिशत महिलाएं रोजगार में हैं, वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 84 प्रतिशत है।
अफगानिस्तान फिलहाल दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां लड़कियों और महिलाओं को माध्यमिक विद्यालय और विश्वविद्यालय की शिक्षा से औपचारिक रूप से बाहर रखा गया है। इससे भविष्य में योग्य महिला शिक्षकों की कमी बढ़ने की आशंका है।
शिक्षा व्यवस्था पहले से ही भीड़भरी कक्षाओं, कमजोर सुविधाओं और बड़ी संख्या में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की चुनौती से जूझ रही है। महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर ऐसे क्षेत्रों पर भी पड़ा है।
पत्रकारिता भी तालिबान शासन में अधिक प्रतिबंधित क्षेत्रों में शामिल हो गई है। वर्ष 2024 में राजनीतिक विषयों पर सीधे प्रसारण पर रोक लगाई गई, तालिबान नेतृत्व की आलोचना को अपराध बनाया गया और मीडिया संस्थानों के लिए बातचीत में शामिल होने वाले विश्लेषकों को लेकर भी नियम तय किए गए।
तालिबान ने इस दौरान अपना मीडिया तंत्र भी मजबूत किया। वर्ष 2025 तक उसके नियंत्रण में करीब 15 प्रमुख टेलीविजन और रेडियो चैनल, समाचार पत्र तथा डिजिटल माध्यम बताए गए। वर्ष 2021 के बाद सैकड़ों अफगान पत्रकारों के देश छोड़ने की बात कही गई है।
न्याय व्यवस्था में भी बड़े बदलाव हुए हैं। वर्ष 2021 से नवंबर 2022 के बीच अदालतों ने कम से कम 18 मामलों में शारीरिक दंड के आदेश दिए। इनमें अधिकतर कथित नैतिक अपराधों के लिए सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने की सजा शामिल थी।
दिसंबर 2022 में परवान प्रांत के एक स्टेडियम में भीड़ के सामने 27 लोगों को कोड़े मारे गए। इससे पहले की अफगान सरकारों के दौर में भी शारीरिक दंड की व्यवस्था रही थी, लेकिन तालिबान शासन में इसका खुले तौर पर और नियमित इस्तेमाल किया गया।
तालिबान की सत्ता के पांच वर्षों में देश में युद्ध की स्थिति जरूर बदली है, लेकिन पूरी तरह शांति नहीं आई। इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के हमले जारी रहे हैं और जातीय तथा धार्मिक अल्पसंख्यक भी निशाने पर रहे हैं। सीमा तनाव और अलग-अलग सशस्त्र समूहों का दबाव भी बना हुआ है।
अफगानिस्तान में भूख और विस्थापन की समस्या भी कायम है। मई 2026 के आकलन के अनुसार अर्थव्यवस्था में सीमित वृद्धि हुई, लेकिन जनसंख्या बढ़ने और पड़ोसी देशों से करीब 37 लाख अफगानों की वापसी के कारण यह वृद्धि पर्याप्त नहीं रही।
वर्ष 2025 के अंत तक करीब 1.4 करोड़ लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया था। ऐसे में तालिबान शासन के पांच वर्ष पूरे होने के साथ अफगानिस्तान में सुरक्षा, आर्थिक स्थिति और नागरिक अधिकारों को लेकर तस्वीर अब भी जटिल बनी हुई है।















