उज्जैन, 17 अगस्त।
सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के विशेष संयोग पर उज्जैन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रविवार रात 12 बजे साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खोले गए। इसके साथ ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भी देर रात से श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं।
देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं। कलेक्टर रोशन सिंह के अनुसार अब तक महाकाल मंदिर में करीब 1.50 लाख और नागचंद्रेश्वर मंदिर में लगभग 4 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। भीड़ को देखते हुए मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए हैं।
श्रद्धालुओं को तय मार्ग से करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर तक पहुंचना पड़ रहा है। नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट रविवार रात 12 बजे विधिवत प्रथम पूजन के बाद खोले गए। ये कपाट अगले 24 घंटे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुले रहेंगे।
महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में केवल नागपंचमी के दिन ही खुलता है। वर्ष के बाकी दिनों में इसके कपाट बंद रहते हैं। इसी कारण यहां दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार सावन सोमवार के साथ पर्व पड़ने से भीड़ और बढ़ गई है।
मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की नागराज के फणों के नीचे विराजमान दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि नागचंद्रेश्वर के दर्शन से भगवान शिव और नागदेवता की कृपा मिलती है और सर्प भय से मुक्ति प्राप्त होती है।
सावन के तीसरे सोमवार को महाकालेश्वर मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोले गए। इसके बाद सभामंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्तिवाचन कर दर्शन-पूजन की अनुमति ली गई। चांदी का पट खोलकर कपूर आरती की गई और गर्भगृह में बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया।
भगवान का दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक हुआ। इसके बाद भांग, चंदन और आभूषणों से दिव्य शृंगार किया गया। भस्म अर्पण से पहले मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन हुआ।
कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूलों की मालाएं पहनाई गईं। फल और मिष्ठान का भोग भी लगाया गया।
भस्म आरती में चलायमान दर्शन व्यवस्था के तहत बिना अनुमति वाले श्रद्धालुओं को भी दर्शन का अवसर मिला। भस्म शृंगार के बाद मंदिर परिसर हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई।
भस्म आरती के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल में नंदी महाराज के दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने नंदीजी के कान में अपनी मनोकामना कही और बाबा महाकाल से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में सुबह से भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है।
शाम 4 बजे निकलेगी महाकाल की तीसरी सवारीसावन के तीसरे सोमवार का मुख्य आकर्षण बाबा महाकाल की तीसरी सवारी होगी। यह शाम 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर से निकलेगी। इसमें भगवान महाकाल के विभिन्न स्वरूप नगर भ्रमण करेंगे।
सवारी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप रजत पालकी, मनमहेश स्वरूप हाथी और शिव-तांडव स्वरूप गरुड़ रथ पर विराजित रहेगा। सवारी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। भक्त मार्ग के दोनों ओर खड़े होकर बाबा महाकाल के दर्शन करेंगे।
दर्शन और सवारी के लिए अलग व्यवस्थाश्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने दर्शन और सवारी के लिए अलग-अलग इंतजाम किए हैं। नागचंद्रेश्वर और महाकाल मंदिर के लिए अलग मार्ग तय किए गए हैं।
सवारी मार्ग पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग और व्यवस्थाओं का पालन करने की अपील की है।















