नई दिल्ली, 17 अगस्त।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा ने वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की प्रतिक्रिया को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस से सवाल किए हैं।
भाजपा मुख्यालय में सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और ऐसे समय में प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सल’ विचारधारा के खतरे की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने चिदंबरम की प्रतिक्रिया को इसी मानसिकता का उदाहरण बताया।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के 13 अप्रैल 2006 के बयान की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस समय नक्सलवाद को भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया था।
उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस के प्रधानमंत्री नक्सलवाद को गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती मानते थे, तो आज पार्टी के वरिष्ठ नेता इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों दे रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान देश में तथाकथित ‘रेड कॉरिडोर’ का विस्तार हुआ था और 180 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित हो गए थे।
सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि पी. चिदंबरम के गृहमंत्री रहने के दौरान 5,000 से अधिक नागरिकों की मौत हुई और नक्सली हिंसा में 1,913 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलियों के पास मौजूद 92 प्रतिशत से अधिक हथियार पुलिस से लूटे गए थे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के साथ विकास पर भी जोर दिया गया है। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में 1,800 से अधिक बैंक शाखाएं, 1,200 से ज्यादा एटीएम और 6,000 से अधिक मोबाइल टावर लगाए गए हैं।
सुधांशु ने कहा कि 22 लाख से अधिक लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है और विकास कार्यों का विरोध करने वालों को उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ सोच से जोड़कर निशाना साधा।















