अनूपपुर, 17 अगस्त।
अनूपपुर और डिंडौरी जिले के वन क्षेत्रों में कई वर्षों बाद एक बार फिर साल बोरर कीट का प्रकोप सामने आया है। इसके कारण बड़ी संख्या में साल के पेड़ प्रभावित हो रहे हैं। पर्यावरणीय संतुलन में साल वनों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए इस समस्या के समय रहते समाधान के लिए वन विभाग, वन समितियों और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास की जरूरत बताई गई है।
इसी उद्देश्य से सोमवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में वन विभाग की ओर से ‘साल बोरर कीट से प्रभावित वन क्षेत्र का प्रबंधन एवं संरक्षण’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि मंडला सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि साल के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली इस समस्या की जानकारी वन समितियों और ग्रामीणों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि समय रहते इसका समाधान किया जा सके। उन्होंने साल वनों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया।
पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने कहा कि नर्मदाचल क्षेत्र साल वन क्षेत्र है। साल के पेड़ों में वर्षा के दौरान गिरने वाले पानी को कई महीनों तक संरक्षित रखने की क्षमता होती है। इसी कारण यह क्षेत्र वर्षभर हराभरा रहने के साथ जल की उपलब्धता भी बनाए रखता है।
उन्होंने कहा कि साल के वृक्षों पर साल बोरर कीट का दोबारा प्रकोप चिंता का विषय है। इसका स्थायी समाधान समय रहते करना सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त शहडोल एमपी सिंह ने साल बोरर कीट की समस्या के समाधान से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व पर भी प्रकाश डाला। वन अधिकारियों ने साल के पेड़ों पर कीट के प्रभाव, बचाव के उपायों और प्रस्तावित कार्ययोजना की जानकारी दी।
कार्यशाला में प्रदेश के वन अधिकारी, वैज्ञानिक और संबंधित विशेषज्ञ मौजूद रहे।















