पुणे, 17 अगस्त।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र के पुणे में आने वाले समय में करीब 60 हजार करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना बनाई गई है। इन परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए नए वित्तीय मॉडल तलाशे जा रहे हैं।
गडकरी ने पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित ‘फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स’ व्याख्यान श्रृंखला को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति की मजबूत नींव के लिए आधुनिक और टिकाऊ बुनियादी ढांचा जरूरी है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की योजना केवल वर्तमान जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि अगले 25 से 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचे से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलता है। परिवहन लागत घटने से भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। बेहतर सड़क संपर्क किसानों के लिए बाजार तक पहुंच आसान करेगा और ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद करेगा।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के निर्माण का अनुभव साझा करते हुए गडकरी ने कहा कि सड़क और राजमार्गों की क्षमता निर्धारित करते समय भविष्य की यातायात जरूरतों का अनुमान लगाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अस्थायी उपायों के बजाय दीर्घकालिक सोच के साथ बुनियादी ढांचा विकसित किया जाना चाहिए।
गडकरी ने ज्ञान से संपदा की अवधारणा को भविष्य की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञान को आर्थिक मूल्य में बदलने के लिए प्रौद्योगिकी, शोध, नवाचार, उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने युवाओं से शॉर्टकट से बचने और ईमानदारी, विश्वसनीयता, गुणवत्ता तथा मजबूत मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। गडकरी ने कहा कि विकास की गति को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ आर्थिक विकास के साथ संतुलित रखना भी जरूरी है।
कार्यक्रम में सिम्बायोसिस की प्रिंसिपल डायरेक्टर और एसआईयू की चांसलर डॉ. विद्या येरवडेकर, कुलपति डॉ. रामकृष्णन रमन, प्रोवोस्ट डॉ. राजीव येरवडेकर और रजिस्ट्रार डॉ. शेजुल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।















