लंबे प्रयासों के बाद सरकार में निगम, मंडल और आयोग में पदाधिकारी बनने का मौका मिला। सोचा था कि पूर्व अध्यक्षों की तरह 15 अगस्त पर अखबारों और चैनलों में शुभकामना संदेश प्रसारित और प्रकाशित करवाएंगे,
लेकिन हाय री किस्मत, मौका तो मिला, पर बजट नहीं मिला। अब आखिर करें भी तो क्या, मन मसोसकर बैठे हैं।















