अहमदाबाद, 18 अगस्त।
गुजरात उच्च न्यायालय ने भावनगर जिले के पालिताणा अंतर्गत राजस्थली बीट में लगभग सोलह सौ नब्बे विशाल पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़े एक गंभीर प्रकरण में जेल में बंद दो फॉरेस्ट गार्ड को जमानत दे दी है। न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संदेश देते हुए दोनों आरोपियों के समक्ष कुल सत्रह सौ नए पौधे लगाने और तीन वर्षों तक उनका संरक्षण करने की कड़ी शर्त रखी है।
यह पूरा मामला पालिताणा रेंज के राजस्थली बीट क्षेत्र का है, जहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई के आरोप में वन रक्षक करशन गोहिल और कल्पेश डाभी के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।
आरोप लगाया गया था कि इन दोनों वन कर्मियों ने लकड़ी के किसी स्थानीय ठेकेदार के साथ सांठगांठ करके कथित तौर पर पच्चीस हजार रुपए का अनुचित लाभ उठाया था और इस अवैध कटाई को होने दिया था, जिसके बाद से दोनों को निलंबित भी कर दिया गया था।
बचाव पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय को यह जानकारी दी गई थी कि इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है और संबंधित अदालत में आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है, तथा जब्त की गई सारी सामग्री भी पुलिस के कब्जे में सुरक्षित है। चूंकि दोनों आरोपी पहले से ही निलंबित चल रहे हैं, इसलिए उनके बाहर आने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ किए जाने की कोई संभावना नहीं है।
दूसरी तरफ, शासकीय वकील ने जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध करते हुए दलील दी कि जिन कर्मचारियों के कंधों पर जंगलों की रक्षा का दायित्व था, यदि वही इस तरह के अपराध में संलिप्त पाए जाएंगे तो इससे समाज में बेहद गलत संदेश प्रसारित होगा।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को पच्चीस-पच्चीस हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही यह निर्देश भी दिया कि जेल से बाहर आने के पंद्रह दिनों के भीतर प्रत्येक आरोपी अपने निजी खर्च पर साढ़े आठ सौ पौधे लगाएगा, जिससे दोनों मिलकर कुल सत्रह सौ वृक्ष रोपित करेंगे।
न्यायालय ने यह भी अनिवार्य शर्त रखी है कि लगाए गए सभी पौधों की अगले तीन साल तक वे खुद देखभाल करेंगे। इस पूरे पौधरोपण और उसकी देखरेख की निरंतर निगरानी स्थानीय आरएफओ और डीसीएफ द्वारा की जाएगी तथा समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में सौंपी जाएगी। इसके अतिरिक्त दोनों को अगले छह महीनों तक प्रत्येक माह एक बार संबंधित रेंज अधिकारी के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। उच्च न्यायालय ने यह भी साफ कर दिया कि यदि इन शर्तों का किसी भी प्रकार से उल्लंघन किया गया तो उनकी जमानत स्वतः निरस्त मान ली जाएगी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर एक टिप्पणी भी की कि उच्च न्यायालय परिसर में निर्माण कार्य के दौरान आड़े आ रहे कुछ पेड़ों को सुरक्षित निकालकर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना थी, लेकिन उपयुक्त मशीनरी उपलब्ध न होने के कारण निर्माण बाधित हो रहा है, जिससे इस प्रकरण की गंभीरता और अधिक बढ़ जाती है।















