कोलकाता, 18 अगस्त।
पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र तारापीठ के 'विदेशिनी' होटल में पेश आए भीषण अग्निकांड में नौ लोगों की मौत के बाद अब यह मामला केवल प्रबंधन की लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने राज्य के दमकल विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस होटल को फायर सेफ्टी की मंजूरी कैसे मिल गई और जांच के दौरान अधिकारियों को इतनी बड़ी खामियां क्यों नजर नहीं आईं।
बीते सोमवार तड़के भड़की आग ने देखते ही देखते होटल के भीतर विकराल रूप धारण कर लिया। चश्मदीदों के मुताबिक, कई लोगों ने जब कमरे का दरवाजा खोलना चाहा तो सामने आग की तेज लपटें थीं, जिसके चलते कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए कमरे के अंदर ही फंसे रह गए। यह बात भी सामने आई है कि कई कमरों में खिड़कियां तक नहीं थीं। हालांकि होटल के पीछे की तरफ एक सुरक्षित रास्ता मौजूद था, मगर बिजली गुल हो जाने के कारण अंधेरे में कई लोग उस रास्ते को तलाश नहीं सके।
इस त्रासद घटना के बाद दमकल विभाग द्वारा किए जाने वाले फायर सुरक्षा निरीक्षणों की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर गहरे सवालिया निशान लग रहे हैं। दमकल विभाग के पूर्व अधिकारी उदय नारायण अधिकारी का कहना है कि राज्य में दुर्घटनाओं के बाद कई समितियां गठित होती हैं, मगर उनकी सिफारिशों को जमीन पर असरदार तरीके से लागू नहीं किया जाता। उनका मानना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय इमारतों का नियमित ऑडिट किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि यदि किसी इलाके में फायर स्टेशन सीमित संख्या में हैं और आग बुझाने वाले अधिकारी ही सुरक्षा निरीक्षण का जिम्मा भी संभालते हैं, तो प्रभावी निगरानी कैसे संभव होगी। उनके अनुसार, कागजी निरीक्षण और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर रहता है, और कई बार पैसे लेकर अनुकूल रिपोर्ट दिए जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं।
दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि नियमों के तहत संबंधित संस्थान को पूर्व सूचना देकर सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाती है। उनका आरोप है कि कई बार निरीक्षण से पहले संस्थान कागजों और मौके पर सब कुछ दुरुस्त दिखा देते हैं, लेकिन बाद में हालात बदल जाते हैं और आपातकाल में वही सुरक्षा इंतजाम नाकाफी साबित होते हैं।
तारापीठ की इस घटना के बाद अब यह जांच का मुख्य विषय बन गया है कि होटल में स्वीकृत सुरक्षा प्रबंध वास्तव में थे या नहीं। क्या आपातकालीन निकास पर्याप्त थे? क्या पिछला दरवाजा खुला हुआ था? क्या कमरों में सुरक्षा संबंधी संकेतक और रोशनी के पुख्ता इंतजाम थे? इन तमाम सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेंगे।
इस हृदयविदारक हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत ने इस त्रासदी को और अधिक गंभीर बना दिया है। मृतकों में दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यह परिवार होटल की ऊपरी मंजिल पर ठहरा हुआ था और आग लगने के बाद नीचे उतरने के प्रयास के दौरान आग की चपेट में आ गया।
पुलिस ने होटल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है और सुरक्षा से जुड़े तमाम दस्तावेजों तथा नियमों के पालन की गहन पड़ताल की जा रही है। इस हादसे के दौरान होटल से 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि सात अन्य घायलों का इलाज रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।
जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि होटल में सुरक्षा प्रबंधन को लेकर दमकल विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है, हालांकि इस होटल को पूर्व के शासनकाल में ही फायर लाइसेंस मिला था। होटल मालिक के एक तत्कालीन रसूखदार नेता के साथ करीबी ताल्लुक होने की बात भी चर्चाओं में है।















