नई दिल्ली, 18 अगस्त।
राजधानी के बहुचर्चित दिल्ली दंगे के दौरान खुफिया विभाग के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया है। न्यायमूर्ति की पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए आगामी 2 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा पूर्व में अंकित शर्मा के कत्ल के इस मामले में मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन समेत अन्य लोगों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जबकि अन्य छह आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। इसी क्रम में सजा पाए आरोपियों द्वारा निचली अदालत के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर आज उच्च स्तर पर सुनवाई की गई।
याचिकाकर्ताओं के पक्ष को सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को नोटिस जारी करने के साथ-साथ उनकी सजा पर रोक लगाने की मांग को लेकर संबंधित जेल अधीक्षक से एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है। सजा के निलंबन और मामले की अगली कार्यवाही अब 2 दिसंबर को तय की गई है।
क्राइम ब्रांच द्वारा वर्ष 2020 की शुरुआत में इस मामले की चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि फरवरी महीने के दौरान ताहिर हुसैन ने अपने आवास और मस्जिद के पास एकत्र हुई उग्र भीड़ की अगुवाई की थी और पूरे घटनाक्रम को सांप्रदायिक रंग दिया था। आरोपपत्र में इस बात का भी खुलासा किया गया था कि खुफिया विभाग के कर्मी को विशेष तौर पर निशाना बनाकर एक सोची-समझी साजिश के तहत मौत के घाट उतारा गया, जिसके पश्चात उनके शव को पास के ही एक नाले में फेंक दिया गया था।
जांच अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों द्वारा साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव को नाले में ठिकाने लगाया जा रहा था। मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि उनके शरीर पर धारदार हथियारों से इकतालीस से अधिक बार प्रहार किए गए थे। पुलिस ने इस खौफनाक वारदात का मुख्य षड्यंत्रकारी ताहिर हुसैन को बताया था और पीड़ित पिता के बयानों के आधार पर कानूनी शिकंजा कसा था।















