बरेली, 19 अगस्त।
भोजीपुरा पुलिस ने आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा कर अपात्र लोगों को लाभ दिलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से सात मोबाइल फोन, 13 फर्जी आयुष्मान कार्ड, छह कूटरचित आधार कार्ड, 22 कूटरचित राशन कार्ड की छायाप्रतियां और 2,700 रुपये नकद बरामद किए हैं। आरोप है कि गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाता था और अस्पतालों में इलाज कराकर सरकारी योजना की धनराशि हासिल करने का प्रयास करता था।
पुलिस के अनुसार, 18 अगस्त को देवरनियां जागीर निवासी हरप्रसाद ने भोजीपुरा थाने में शिकायत दी थी। आरोप है कि उससे 47 हजार रुपये लेकर उसके और उसकी बेटी के आधार कार्ड में कूटरचना की गई तथा फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाए गए। कार्ड फर्जी पाए जाने के कारण उसकी बेटी का ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में इलाज नहीं हो सका। बाद में रुपये वापस मांगने पर आरोपित उसे टालते रहे।
शिकायत के आधार पर भोजीपुरा थाने में आबिद, सलमान, अफरोज, अरमान, देशरत्न समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जांच में गिरोह के संगठित तरीके से काम करने की जानकारी मिलने पर मुकदमे में बीएनएस की धारा 111 भी बढ़ाई गई।
ट्यूबवेल के पास से पांचों गिरफ्तार
प्रभारी निरीक्षक कुँवर बहादुर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 19 अगस्त की सुबह अभयपुर से प्रहलादपुर जाने वाले मार्ग पर राममूर्ति अस्पताल के बालक छात्रावास के पीछे ट्यूबवेल के पास घेराबंदी की। सुबह 7:58 बजे पुलिस ने पांचों आरोपितों को पकड़ लिया। इनमें आबिद पुत्र भूरे खां निवासी अभयपुर बैकुंठापुर, सलमान पुत्र शहादत खां निवासी अभयपुर बैकुंठापुर, अरमान पुत्र इस्लाम उल्ला निवासी फरीदापुर परतापुर, अफरोज पुत्र अफसर खां निवासी रमपुरा माफी और देशरत्न पुत्र चरन सिंह निवासी वसुधरन जागीर शामिल हैं।
मोबाइल से तैयार करते थे फर्जी दस्तावेज
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे मिलकर अपात्र लोगों को मुफ्त इलाज का लालच देते थे। इसके बाद उनसे आधार और राशन कार्ड लिए जाते थे। मोबाइल फोन में ऐप और पोर्टल के माध्यम से दस्तावेजों में नाम-पता बदलकर फर्जी आयुष्मान कार्ड तैयार किए जाते थे। बाद में इन्हें किसी भी दुकान से प्रिंट कराया जाता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपित प्रत्येक व्यक्ति से करीब 35 से 40 हजार रुपये लेते थे। इसके बाद अस्पतालों के कुछ कर्मचारियों से कथित मिलीभगत कर अपात्र लोगों का इलाज कराने और योजना के माध्यम से सरकारी धन प्राप्त करने का प्रयास किया जाता था। आरोपितों ने पूछताछ में राममूर्ति अस्पताल, भोजीपुरा के नितिन समेत अन्य लोगों की भूमिका का भी दावा किया है। मुरादाबाद निवासी नरेश का नाम भी सामने आया है, जो संभल सीएमओ कार्यालय में कार्यरत बताया गया है। पुलिस इन दावों की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, मामले के वादी से 47 हजार रुपये लेकर उसके और उसकी बेटी के आधार कार्ड में कूटरचना की गई थी। फर्जी कार्ड के कारण बेटी का ऋषिकेश एम्स में इलाज नहीं हो सका। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों के फर्जी कार्ड बनाए और कितने अस्पतालों में उनका इस्तेमाल किया गया।
एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्र ने बताया कि आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा कर अपात्र लोगों को लाभ दिलाने और सरकारी धनराशि हड़पने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में सामने आए अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आबिद का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ प्रेमनगर थाने में वर्ष 2021 में चोरी, चोरी का माल रखने और धोखाधड़ी से संबंधित मामला तथा भोजीपुरा थाने में वर्ष 2022 में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। पुलिस ने पांचों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है।















