भोपाल, 19 अगस्त।
भोपाल सेंट्रल जेल में बंदियों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक होने के साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। 15 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार जेल में 101 बंदी मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। इसके अलावा 111 बंदी उच्च रक्तचाप, 67 मधुमेह, 28 हृदय रोग, 23 अस्थमा, 22 मिर्गी और 13 कैंसर से पीड़ित दर्ज किए गए हैं।
भोपाल सेंट्रल जेल में कुल 3669 बंदी निरुद्ध हैं, जबकि जेल की निर्धारित क्षमता 2631 है। यानी क्षमता से 1038 अधिक बंदी यहां मौजूद हैं। इनमें 3484 पुरुष और 185 महिलाएं शामिल हैं। आंकड़ों में 13 बच्चों का भी उल्लेख है। क्षमता से अधिक बंदियों के कारण आवास, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य बना बड़ी चिंता
जेल के स्वास्थ्य आंकड़ों में मानसिक बीमारी से पीड़ित 101 बंदियों की संख्या विशेष ध्यान आकर्षित करती है। जेल का वातावरण, परिवार से दूरी, मुकदमों की लंबी प्रक्रिया, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भीड़भाड़ जैसी परिस्थितियां बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में मानसिक बीमारी से पीड़ित बंदियों की पहचान, नियमित चिकित्सकीय निगरानी, काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ उपचार जरूरी हो जाता है।
हालांकि उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि मानसिक बीमारी से पीड़ित बंदियों की संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले कितनी बढ़ी है। पुराने तुलनात्मक आंकड़ों के अभाव में 101 की संख्या को सीधे बढ़ती प्रवृत्ति नहीं कहा जा सकता। फिर भी इतने बड़े जेल परिसर में 101 मानसिक रोगियों का दर्ज होना मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत को जरूर सामने लाता है।
एचआईवी समेत कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित बंदी
भोपाल सेंट्रल जेल में मानसिक बीमारी के अलावा कई अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित बंदी भी मौजूद हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 47 बंदी एचआईवी पॉजिटिव, सात हेपेटाइटिस और दो कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं। वहीं उच्च रक्तचाप के 111 और मधुमेह के 67 मरीज दर्ज किए गए हैं।
तीन मरीज बाहरी अस्पताल में भर्ती बताए गए हैं। गंभीर और लंबे समय से चलने वाली बीमारियों के बीच नियमित स्वास्थ्य जांच, दवाओं की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ अस्पतालों में उपचार की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
1786 सजायाफ्ता, 1729 विचाराधीन बंदी
जेल में मौजूद 3669 बंदियों में 1786 मियादी यानी सजायाफ्ता और 1729 हवालाती यानी विचाराधीन बंदी हैं। मियादी बंदियों में 1681 पुरुष और 105 महिलाएं हैं। हवालाती बंदियों में 1656 पुरुष और 73 महिलाएं शामिल हैं।
जेल रिकॉर्ड में विदेशी, सिमी, नक्सली, किन्नर, सिविल सहित अन्य विशेष श्रेणियों के बंदी भी दर्ज हैं।
14 उम्रकैदियों को समय पूर्व रिहाई
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य शासन की विशेष सजा माफी नीति के तहत भोपाल सेंट्रल जेल से 14 उम्रकैदियों को समय पूर्व रिहा किया गया था। इनमें एक महिला भी शामिल थी। इसके बाद भी 15 अगस्त को जेल में कुल 3669 बंदी दर्ज किए गए।
क्षमता से करीब 39 प्रतिशत अधिक बंदी
जेल की 2631 की निर्धारित क्षमता के मुकाबले 3669 बंदियों की मौजूदगी का अर्थ है कि यहां क्षमता से करीब 39 प्रतिशत अधिक बंदी हैं। लगातार बनी यह भीड़ जेल प्रशासन के सामने आवास के साथ चिकित्सा, स्वच्छता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ा रही है।
भोपाल सेंट्रल जेल के आंकड़े बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य को जेल व्यवस्था में केवल उपचार का विषय मानने के बजाय प्राथमिकता के स्तर पर देखने की आवश्यकता है। 101 मानसिक रोगियों के साथ अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बंदियों की मौजूदगी और क्षमता से 1038 अधिक बंदियों का दबाव जेलों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तथा मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करता है।















