मध्यप्रदेश सरकार और उसके मुखिया मध्यप्रदेश भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार काम कर रहे हैं। प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग कम-से-कम हो, यह फरमान भी समय-समय पर जारी होता है।
लेकिन मंत्रालय के सभी चेंबरों में पानी अब गिलास में नहीं, बोतलों में ही सर्व किया जाता है। जब मंत्रालय में ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर इतनी घोर लापरवाही है तो प्रदेश का क्या हाल होगा? इसलिए कहते हैं कि कागजी कार्रवाई और बयान अलग-अलग होते हैं। पर नामी-गिरामी कंपनी का पानी भी जरूरी है।















