ढाका, 19 अगस्त।
बांग्लादेश अवामी लीग की चर्चित नेत्री और पूर्व मंत्री डॉ. दीपू मोनी के पति तौफीक नवाज का गत मंगलवार की रात्रि ढाका के एक चिकित्सालय में निधन हो गया है। दीपू मोनी के बड़े भाई जेआर वदूद टीपू ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जनाजे की नमाज तथा अंतिम संस्कार के स्थान और वक्त को लेकर बुधवार दोपहर के पश्चात अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस समय दीपू मोनी न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं और उन्होंने पति के अंतिम दर्शन हेतु पैरोल की मांग को लेकर अर्जी दी है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार, जेल में बंद अवामी लीग की नेत्री दीपू मोनी के भाई ने बताया कि उनके बहनोई तौफीक नवाज ने रात 10:27 बजे कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल (यूनाइटेड हॉस्पिटल) में अंतिम सांस ली। वह पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और अस्पताल में उनका चिकित्सा उपचार चल रहा था। नवाज की जनाजा नमाज और दफनाने की प्रक्रिया के आयोजन पर बुधवार दोपहर के बाद निर्णय लिया जाएगा। दिवंगत नवाज को वर्ष 2019 में ब्रेन स्ट्रोक का दौरा पड़ा था।
बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व वकील और शास्त्रीय संगीत कला के जानकार नवाज को इसी वर्ष 27 मई के रोज एक रिश्तेदार की मदद से व्हीलचेयर पर अदालत लाया गया था, ताकि वह सुनवाई के लिए आई अपनी पत्नी से मिल सकें। पूर्व मंत्री डॉ. दीपू मोनी को 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद 19 अगस्त 2024 को ढाका के बारीधारा इलाके से गिरफ्तार किया गया था।
वह वर्तमान में मुंशीगंज जिला कारागार में बंद हैं। बीच में स्वास्थ्य अधिक खराब होने के कारण उन्हें इलाज के वास्ते ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से स्वास्थ्य लाभ मिलने के पश्चात उन्हें पुनः जेल भेज दिया गया था। उनके खिलाफ हत्या, मानवता के विरुद्ध अपराध, भ्रष्टाचार और हिंसा भड़काने जैसे साठ से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से न्यायालय द्वारा उन्हें आधिकारिक रूप से 38 मामलों में आरोपी के तौर पर दिखाया गया है।
जून 2026 के दौरान उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा कुछ मामलों में अंतरिम जमानत प्रदान की गई थी, परंतु सुप्रीम कोर्ट के अपीलीय डिवीजन ने सरकारी पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी जमानत के आदेश पर रोक लगा दी। इस कानूनी पेचीदगी के चलते वह जेल से बाहर नहीं आ पाईं। पति तौफीक नवाज के इंतकाल के बाद उनके अधिवक्ताओं ने उनके अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में सम्मिलित होने के वास्ते मुंशीगंज जिला प्रशासन के समक्ष पैरोल पर रिहाई की गुहार लगाई है।















