भोपाल, 19 अगस्त।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित पीएम श्री डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पस स्कूल यानी डीएमएस के सैकड़ों छात्रों ने अपने विद्यालय का केंद्रीय विद्यालय संगठन में विलय किए जाने के सरकारी प्रस्ताव के विरोध में सड़कों पर उतरकर एक अनूठा प्रदर्शन किया है। नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक के बच्चों द्वारा निकाला गया यह मार्च इस बात का गवाह है कि देश की सबसे युवा नस्ल ने अब अपने अधिकारों के लिए बड़े पैमाने पर आवाज उठानी शुरू कर दी है।
इस विरोध प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ा कारण इस संस्थान की अनूठी पहचान का खोना है। दिसंबर 1965 में एनसीईआरटी के तहत स्थापित यह स्कूल देश के सिर्फ चार विशेष प्रायोगिक केंद्रों में शुमार है जहाँ नई शिक्षण तकनीकों का परीक्षण किया जाता है। छात्रों और शिक्षकों का यह तर्क है कि इस संस्थान को केवीएस की कठोर प्रशासनिक व्यवस्था में ढेलने से इसकी प्रगतिशील शैक्षणिक पहचान खत्म हो जाएगी। इसके अलावा विद्यालय में चल रहे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और लगभग एक हजार विद्यार्थियों के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
इस आंदोलन के दौरान तीन से चार सौ बच्चों ने परिसर के बाहर एकत्र होकर हाथों में तख्तियां लेकर जमकर नारेबाजी की। इन छात्रों ने क्षेत्रीय महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर एस.के. गुप्ता को एक ज्ञापन सौंपकर इस विलय की योजना को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। छात्र संगठनों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि यदि यह प्रस्ताव तुरंत वापस नहीं लिया गया तो वे अपने इस अभियान को और अधिक तीव्र कर देंगे।















