भोपाल, 19 अगस्त।
सरकारी दफ्तरों का कामकाज अब पूरी तरह कंप्यूटर और इंटरनेट पर आ गया है। फाइलें ऑनलाइन चलती हैं, वेतन पोर्टल पर बनते हैं और योजनाओं की मॉनिटरिंग डिजिटल डैशबोर्ड से होती है। ऐसे में सिर्फ कंप्यूटर ऑन-ऑफ करना और टाइपिंग आना अब पर्याप्त नहीं रहा। मध्यप्रदेश सरकार ने तय किया है कि सरकारी कामकाज से जुड़े हर अधिकारी और कर्मचारी को साइबर सुरक्षा की समझ भी होनी चाहिए। अगर कोई कर्मचारी 50 क्रेडिट पॉइंट नहीं जुटा पाता है तो उसके वेतन पर असर पड़ सकता है। यह नियम नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के कंप्यूटर ऑपरेटरों पर भी लागू होगा।
नगरीय प्रशासन और विकास विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। अब केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं, बल्कि डेटा की सुरक्षा, मजबूत पासवर्ड और साइबर हमलों से बचाव की जानकारी भी जरूरी होगी। इसका मकसद सरकारी डेटा को सुरक्षित रखना और आम जनता की निजी जानकारी को लीक होने से बचाना है।
नए नियम के अनुसार हर सरकारी कर्मचारी को तय समय में 50 क्रेडिट पॉइंट पूरे करने होंगे। ये पॉइंट ऑनलाइन कोर्स और प्रशिक्षण के जरिए जुटाए जाएंगे। कोर्स में साइबर सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांत, मजबूत पासवर्ड बनाना, फिशिंग ईमेल की पहचान, सरकारी पोर्टल का सुरक्षित इस्तेमाल और डेटा लीक होने पर उठाए जाने वाले कदम जैसी बातें शामिल होंगी।
अगर कोई कर्मचारी यह लक्ष्य पूरा नहीं करता है तो उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट और वेतन वृद्धि पर असर पड़ सकता है। विभाग का मानना है कि जब तक हर स्तर के कर्मचारी को साइबर सुरक्षा की समझ नहीं होगी, तब तक सरकारी सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकता।
सबसे ज्यादा जोर कंप्यूटर ऑपरेटरों पर दिया गया है, क्योंकि वही रोजाना सरकारी पोर्टल पर डेटा फीड करते हैं और जनता की निजी जानकारी से सीधे जुड़े होते हैं। अब ऑपरेटरों को केवल टाइपिंग और सॉफ्टवेयर चलाना ही नहीं, बल्कि साइबर हमलों की पहचान और उनसे बचाव के तरीके भी सीखने होंगे। उनके लिए अलग मॉड्यूल तैयार किया जाएगा, जिसमें पासवर्ड प्रबंधन, दो चरणों में सत्यापन और संदिग्ध लिंक से बचने की ट्रेनिंग दी जाएगी। परीक्षा पास करने के बाद ही उन्हें आगे काम करने की अनुमति मिलेगी। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि साइबर हमलों की शुरुआत कई बार मानवीय गलती से होती है।
पिछले कुछ वर्षों में सरकारी वेबसाइटों और पोर्टलों पर साइबर हमलों का खतरा बढ़ा है। हैकर्स सरकारी डेटा चुराकर उसका दुरुपयोग कर सकते हैं या फिरौती मांग सकते हैं। ऐसे में सिर्फ फायरवॉल और एंटीवायरस से काम नहीं चलता। हर कर्मचारी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। एक कमजोर पासवर्ड, संदिग्ध लिंक पर क्लिक या अनजान ईमेल खोलना पूरे सिस्टम के लिए खतरा बन सकता है।
नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों, संयुक्त संचालकों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को नए नियम की जानकारी दें और समय पर कोर्स पूरा करवाएं। ऑनलाइन पोर्टल पर होने वाले हर काम का रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सके।
इस नियम को लेकर कर्मचारियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ इसे जरूरी कदम मानते हैं। उनका कहना है कि आज के समय में साइबर सुरक्षा की जानकारी हर कर्मचारी को होनी चाहिए। वहीं कुछ कर्मचारी इसे अतिरिक्त बोझ मान रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से काम का दबाव अधिक है और अब कोर्स तथा परीक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। यह चिंता अपनी जगह है, लेकिन सरकारी कामकाज में डिजिटल निर्भरता को देखते हुए साइबर सुरक्षा को अतिरिक्त काम के बजाय काम का हिस्सा मानना होगा।
शुरुआत में दिक्कत हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यवस्था आदत बन जाएगी। बैंकिंग और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। अब सरकारी विभागों में भी इसी तरह की जागरूकता जरूरी है। डिजिटल व्यवस्था जितनी तेजी से बढ़ रही है, उसकी सुरक्षा के लिए कर्मचारियों की समझ भी उसी गति से बढ़नी चाहिए।
डिजिटल इंडिया का सपना तभी पूरा होगा, जब तकनीक के साथ जिम्मेदारी भी आए। सरकारी दफ्तरों में रोजाना बड़ी मात्रा में नागरिकों से जुड़ा डेटा तैयार और इस्तेमाल होता है। इसमें व्यक्तिगत जानकारी से लेकर योजनाओं, भुगतान और प्रशासनिक रिकॉर्ड तक शामिल होते हैं। इसलिए डेटा की सुरक्षा केवल आईटी विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। जिस कर्मचारी के हाथ में डेटा है, उसकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस प्रशिक्षण को आसान और रोचक बनाया जाना चाहिए। वीडियो ट्यूटोरियल, लाइव वेबिनार और आसान भाषा में गाइड उपलब्ध कराई जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी भी इसे आसानी से समझ सकें। साथ ही समय-समय पर मॉक ड्रिल और साइबर हमले का अभ्यास कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति में कर्मचारी घबराएं नहीं और तुरंत सही कदम उठा सकें।
नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में आईटी सेल को भी मजबूत किया जाना चाहिए। किसी कर्मचारी को संदिग्ध गतिविधि या साइबर हमले की जानकारी मिले तो रिपोर्टिंग और समाधान की व्यवस्था तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए। प्रशिक्षण तभी प्रभावी होगा, जब उसके साथ तकनीकी सहायता और स्पष्ट जवाबदेही भी हो।
कंप्यूटर चलाना आना अब पुरानी बात हो गई है। समय की मांग है कि हर सरकारी कर्मचारी सुरक्षित तरीके से डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल करना सीखे। मध्यप्रदेश सरकार का 50 क्रेडिट पॉइंट वाला नियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केवल प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज की बदलती जरूरत का संकेत है।
बात सिर्फ नियम लागू करने की नहीं, आदत बदलने की है। जब हर कर्मचारी यह समझेगा कि उसकी एक छोटी-सी गलती पूरे सिस्टम और लाखों लोगों की जानकारी को खतरे में डाल सकती है, तभी डिजिटल शासन वास्तव में सुरक्षित और मजबूत बनेगा। तकनीक सरकारी कामकाज को तेज और आसान बना सकती है, लेकिन उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी इंसान को ही निभानी होगी।















