भोपाल, 20 अगस्त।
भोपाल नगर निगम की परिषद बैठक में बुधवार को अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी का मुद्दा सामने आया। मेयर इन कौंसिल (एमआईसी) सदस्य और शहरी गरीबी एवं उपशमन विभाग की अध्यक्ष छाया ठाकुर ने निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके ही विभाग से जुड़ी योजनाओं, बैठकों और अहम मामलों की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी जाती।
मामला उस समय गरमा गया, जब कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने संबल घोटाले को लेकर सवाल किया। विभाग की अध्यक्ष छाया ठाकुर ने इसका जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि अधिकारियों ने उन्हें इस मामले की जानकारी ही नहीं दी है। उन्होंने कहा कि सवाल और उसके जवाब से संबंधित जानकारी भी उन्हें पहले उपलब्ध नहीं कराई गई, इसलिए इस विषय पर महापौर या संबंधित अधिकारी ही जवाब दे सकते हैं।
अधिकारियों पर टालमटोल का आरोप
छाया ठाकुर ने बताया कि वह 22 सितंबर 2022 से एमआईसी सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी उन्हें विश्वास में लेकर काम नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग की समीक्षा बैठक बुलाने और कामकाज से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग वह लगातार करती रही हैं, लेकिन अधिकारी इस मामले में टालमटोल करते रहे।
उन्होंने कहा कि एमआईसी सदस्य संबंधित विभाग का अध्यक्ष होता है। इसलिए उसे विभाग की योजनाओं, वित्तीय मामलों, काम की प्रगति और महत्वपूर्ण या विवादित मामलों की जानकारी मिलना जरूरी है। यदि विभागाध्यक्ष को ही जानकारी उपलब्ध नहीं होगी तो परिषद में पार्षदों के सवालों का जवाब देना कठिन हो जाएगा।
विपक्ष को मिला निगम प्रशासन घेरने का मौका
छाया ठाकुर के बयान के बाद विपक्षी पार्षदों ने भी निगम प्रशासन पर सवाल उठाए। कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि जब विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले जनप्रतिनिधि को ही अधिकारियों से आवश्यक जानकारी नहीं मिल रही है, तो निगम की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर स्थिति क्या होगी।
परिषद अध्यक्ष ने भी जताई नाराजगी
मामले पर परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बननी चाहिए और एमआईसी सदस्यों को उनके विभाग से संबंधित जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए।
संबल घोटाले जैसे संवेदनशील मामले में विभागीय अध्यक्ष द्वारा जानकारी नहीं होने की बात कहे जाने से निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। अब देखना होगा कि परिषद की हिदायत के बाद अधिकारियों और एमआईसी सदस्यों के बीच समन्वय में कितना सुधार आता है।















