भोपाल, 20 अगस्त।
मध्य प्रदेश की पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू कल्याण राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि शासकीय योजनाओं की प्रमाणिक जानकारी और सामाजिक संस्थाओं के जमीनी स्तर पर किए जा रहे नवाचारों को एक साथ जोड़कर बहुआयामी संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके जरिए विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू समुदायों के स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर और रोजगार को आपस में जोड़कर आजीविका के नए अवसर विकसित किए जाएंगे।
राज्यमंत्री गौर गुरुवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए शासन और गैर-सरकारी संस्थाएं मिलकर नए प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंत्योदय के लक्ष्य को साकार करने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम किया जा रहा है।
विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू समुदाय विकास संचालनालय की ओर से आयोजित कार्यशाला में राज्यमंत्री गौर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यशाला में शामिल सभी प्रतिनिधियों से समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन में बेहतर बदलाव लाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ काम करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में पद्मश्री भीकू रामजी ईदाते, सामाजिक चिंतक गोरेलाल, भारत सरकार के संबंधित विकास बोर्ड के संचालक रहीस एम, विकास बोर्ड के अध्यक्ष बाबूलाल बंजारा, संचालक बुद्धेश कुमार वैद्य, विभागीय अधिकारी, विषय विशेषज्ञ और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
राज्यमंत्री गौर ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद सामाजिक संस्थाएं उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इन समुदायों का इतिहास त्याग, तपस्या और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान से समृद्ध रहा है। इसलिए इनके संरक्षण के साथ सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि शासन, प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का यह साझा मंच वंचित वर्गों के विकास में महत्वपूर्ण साबित होगा।
पद्मश्री भीकू रामजी ईदाते ने राज्यमंत्री गौर के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन समुदायों के समग्र विकास के लिए जमीनी स्तर पर घर-घर पहुंचकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने महाराष्ट्र की तर्ज पर मध्यप्रदेश में आश्रम शालाओं, शोध केंद्रों और संयुक्त समितियों के गठन का सुझाव दिया, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक बस्ती के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
विकास बोर्ड के अध्यक्ष बाबूलाल बंजारा ने सघन सर्वेक्षण जल्द पूरा कराने और पात्र लोगों को जाति प्रमाण पत्र तथा आवास उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बस्ती विकास और छात्रावास अनुदान राशि में वृद्धि के लिए राज्यमंत्री गौर का आभार जताया। सामाजिक चिंतक गोरेलाल ने रोटी, कपड़ा, मकान और स्वरोजगार जैसी मूलभूत जरूरतों के स्थायी समाधान के साथ समुदायों के लोकगीतों और लोककथाओं के संरक्षण की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में विभाग की कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक संस्थाओं के जमीनी अनुभवों को एकीकृत कर संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने की रूपरेखा पर चर्चा की गई। इसमें जन-अभियान परिषद, सीड योजना, ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण तथा बडी फॉर स्टडी और उड़ान परियोजना जैसी शैक्षणिक पहलों को जोड़ने की योजना है। इसके जरिए बेड़िया, नट-नागर और लोहपीट जैसे समुदायों के शैक्षणिक और सामाजिक विकास के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी।















