वाशिंगटन, 20 अगस्त।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को सूचीबद्ध या सूची से हटाने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बरतने की जोरदार वकालत की गई है। भारत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि परिषद का दुरुपयोग संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए आतंकवादियों को वैध ठहराने के वास्ते बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।
सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारत के मिशन की प्रभारी योजना पटेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि परिषद की सदस्यता के साथ बड़ी जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। इसे किसी भी कीमत पर संकीर्ण और स्वार्थी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद और प्रतिबंधों से जुड़ी समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति में हो रही देरी को तुरंत दूर किया जाना चाहिए। भारत ने इसके लिए एक निश्चित और गैर-समझौतावादी समयसीमा तय करने की मांग की है ताकि इन अहम अंगों का कामकाज सुचारू रूप से चल सके।
वैश्विक शांतिरक्षा अभियानों के संदर्भ में बोलते हुए यह भी कहा गया कि सीधे तौर पर जुड़े देशों को प्रमुख फैसलों और संसाधनों से जुड़े निर्णयों में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसके साथ ही परिषद के मौजूदा ढांचे में व्यापक सुधार की आवश्यकता को भी दृढ़ता से दोहराया गया।















