इस्लामाबाद, 20 अगस्त।
पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अस्पताल भेजने के शीर्ष अदालत के आदेश के खिलाफ सरकारी तंत्र पूरी तरह से सक्रिय हो गया है और इस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। आदियाला जेल में बंद पीटीआई संस्थापक के इलाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब सरकार ने इसके विरोध में कानूनी कदम उठाया है।
संघीय प्रशासन की तरफ से अदालत में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी गई है। इस नई अर्जी में कोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी गई है जिसके तहत इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाना था। सरकार का तर्क है कि इस तरह का अंतरिम आदेश तय किए गए कानूनी दायरे से बाहर जाकर पारित किया गया है, जिस पर दोबारा विचार किए जाने की सख्त जरूरत है।
याचिका में साल 2023 के अगस्त महीने की उस सजा का हवाला भी दिया गया है जिसके तहत उन्हें जेल भेजा गया था। सरकारी पक्ष का कहना है कि इससे पहले उच्च न्यायालय ने भी उन्हें अस्पताल में शिफ्ट किए जाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। इसके अलावा जेल मैनुअल के नियमों का जिक्र करते हुए यह दलील दी गई है कि कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण और अस्पताल ट्रांसफर के मामलों में सरकारी अनुमति और जेल महानिरीक्षक की प्रक्रिया का पालन होना अनिवार्य है।
दूसरी तरफ, सर्वोच्च अदालत ने अपने निर्देश में यह साफ किया था कि मेडिकल बोर्ड के गठन के साथ ही उन्हें परिवार और निजी चिकित्सकों से मिलने की छूट दी जाएगी। हालांकि, इन तमाम अदालती फैसलों के बीच सरकारी स्तर पर इस आदेश को पलटने के लिए कानूनी दांवपेंच तेज हो चुके हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और ज्यादा बढ़ गई है।















