नई दिल्ली, 21 अगस्त।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि अगले 10 से 14 महीनों में भारत का एक मजबूत मोबाइल ब्रांड बाजार में आ सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तीन संभावित कंपनियां भारतीय ब्रांड विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं, हालांकि इन कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
वैष्णव ने नई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत ने मोबाइल निर्माण क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार कर लिया है। अब देश का अगला लक्ष्य अपना भारतीय ब्रांड, भारतीय डिजाइन और अपनी तकनीक विकसित करना है। यह योजना एक अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी और पांच वर्षों तक चलेगी। इसके लिए 62,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय मोबाइल ब्रांड तैयार करने वाली कंपनियों का डिजाइन भारत में विकसित होना चाहिए और उसका स्वामित्व भी संबंधित कंपनी के पास होना चाहिए। उत्पाद किसी अन्य ब्रांड की नकल नहीं होना चाहिए। सरकार चाहती है कि भारतीय कंपनियां ऐसे उत्पाद तैयार करें, जो अपने वर्ग में दुनिया के बेहतर उत्पादों को चुनौती दे सकें।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि तीन संभावित कंपनियों को डिजाइन तैयार करने की दिशा में काम करने के लिए कहा गया है। कंपनियां किफायती, प्रीमियम या अन्य श्रेणियों में अपना बाजार तय कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ब्रांड के लिए अपनी तकनीक और बौद्धिक संपदा विकसित करना सबसे अहम है और इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
नई योजना का उद्देश्य देश में मोबाइल उत्पादन बढ़ाना, मोबाइल के हिस्सों का घरेलू निर्माण बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और देश में अधिक मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से भारतीय ब्रांडों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
योजना के तहत पांच वर्षों में करीब 39 लाख करोड़ रुपये के संचयी मोबाइल फोन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही लगभग 60 हजार नए प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य है। मोबाइल निर्माताओं को पात्र बिक्री पर 2.25 से पांच प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं, प्रमुख हिस्सों की घरेलू खरीद बढ़ाने पर अतिरिक्त 1.5 प्रतिशत और भारतीय डिजाइन तथा अनुसंधान एवं विकास के लिए अतिरिक्त तीन प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जाएगा।
वैष्णव ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य केवल मोबाइल फोन की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि भारत में डिजाइन, तकनीक और बौद्धिक संपदा के विकास का मजबूत आधार तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ विदेशी कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने उत्पाद और ब्रांड भी विकसित करना चाहता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब 12 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात करीब 11 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा है, वहीं मोबाइल फोन निर्यात में करीब 166 गुना वृद्धि हुई है।
कृष्णन ने कहा कि वर्ष 2014-15 में भारत में बिकने वाले करीब 70 से 75 प्रतिशत मोबाइल फोन आयात किए जाते थे, लेकिन अब भारत मोबाइल फोन का बड़ा निर्यातक बन चुका है। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया में मोबाइल फोन बनाने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है और देश में बिकने वाले लगभग सभी मोबाइल फोन भारत में तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन पिछले वर्ष भारत से निर्यात होने वाली सबसे बड़ी एकल वस्तु बन गया। करीब एक दशक पहले स्मार्टफोन भारत की शीर्ष 100 निर्यात वस्तुओं में भी शामिल नहीं था। अब इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात की तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन चुका है।
सचिव ने बताया कि मोबाइल फोन निर्माण में घरेलू मूल्यवर्धन योजना की शुरुआत के समय करीब 15 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर लगभग 23 प्रतिशत हो गया है। सरकार इसे आगे 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
उन्होंने कहा कि देश के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में करीब 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें मोबाइल फोन विनिर्माण से करीब 12 लाख रोजगार जुड़े हैं। मोबाइल उद्योग में विकसित तकनीक और कौशल का लाभ लैपटॉप, टीवी, स्मार्टवॉच, ड्रोन, चिकित्सा उपकरण और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों को भी मिल रहा है।
कृष्णन ने बताया कि इससे पहले लागू उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत मोबाइल फोन उत्पादन करीब 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि लक्ष्य 8.12 लाख करोड़ रुपये था। इस योजना के तहत निवेश भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा।
उन्होंने कहा कि मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में करीब 14 अरब डॉलर का निवेश हुआ है और इससे लगभग 12 लाख रोजगार को समर्थन मिला है। मोबाइल के विभिन्न हिस्सों का घरेलू निर्माण बढ़ने से भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला भी मजबूत हुई है।
वैष्णव ने कहा कि भारत अब मोबाइल फोन आयात करने वाले देश से निर्यातक देश बन चुका है। देश में इस्तेमाल होने वाले 99 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन भारत में ही निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य मोबाइल निर्माण से आगे बढ़कर महत्वपूर्ण हिस्सों, सामग्री, डिजाइन और तकनीक को भी देश में विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि मोबाइल के हिस्सों का निर्यात भी शुरू हो गया है और पिछले वर्ष भारत ने चीन को भी कुछ मोबाइल घटकों का निर्यात किया। वैष्णव ने कहा कि बीते दस वर्षों में भारत ने मोबाइल निर्माण क्षेत्र में लंबी दूरी तय की है। अब अगला चरण भारतीय कंपनियों, भारतीय डिजाइन और भारतीय तकनीक को आगे बढ़ाने का है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और नए बाजारों के अवसर बढ़ेंगे।
मेमोरी चिप की कीमतों पर पूछे गए सवाल के जवाब में वैष्णव ने कहा कि दुनियाभर में मेमोरी चिप की मांग बढ़ी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े डेटा सेंटरों में इसकी बढ़ती जरूरत भी एक कारण है। उन्होंने कहा कि भारत में मेमोरी चिप उत्पादन बढ़ रहा है और वैश्विक कंपनियां भी अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं, ऐसे में बाजार के सामान्य चक्र के साथ कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।















