सीहोर, 21 अगस्त।
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम सावन के पावन अवसर पर शिवभक्ति में डूबा हुआ है। शुक्रवार को सुबह से ही सीवन नदी के तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। यहां से पवित्र जल लेकर हजारों कांवड़ यात्री हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष के साथ कुबेरेश्वरधाम पहुंचे और भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक किया।
कांवड़ यात्रियों की भारी संख्या के कारण सीवन नदी के तट से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक पूरा मार्ग भक्तिमय नजर आया। कई श्रद्धालु पैदल कांवड़ लेकर पहुंचे, वहीं कुछ भजन-कीर्तन करते हुए अपनी आस्था प्रकट कर रहे थे। बारिश और धूप के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और वे करीब 11 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर धाम पहुंचे।
शिवभक्ति बनी श्रद्धालुओं की ताकत
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव की भक्ति ही सबसे बड़ी ऊर्जा बनी हुई है। रास्तेभर श्रद्धालु शिव नाम का जाप करते हुए आगे बढ़ते रहे। कुबेरेश्वरधाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पित कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
कई श्रद्धालुओं ने बताया कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव के प्रति आस्था और आत्मिक शांति का माध्यम भी है।
सेवा पंडालों में श्रद्धालुओं की सुविधा
कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक कई स्थानों पर सेवा कार्य किए जा रहे हैं। विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा और पंडित समीर शुक्ला सहित सेवादारों ने श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी वितरण की व्यवस्था की।
इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से रास्ते में पेयजल, चाय-नाश्ता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के मन में महादेव की भक्ति और शिव नाम का जाप ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान के बजाय संतोष और आस्था का भाव दिखाई देता है।
कांवड़ यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण सीवन नदी का तट और कुबेरेश्वरधाम तक का मार्ग पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। भगवा वस्त्रों में कांवड़ लेकर चलते श्रद्धालुओं और गूंजते जयकारों से वातावरण में आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है। सावन के अंतिम दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है।















