भोपाल, 21 अगस्त।
ई-अटेंडेंस व्यवस्था की अनिवार्यता और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर मध्य प्रदेश कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने शुक्रवार को भोपाल के अंबेडकर पार्क में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कृषि विस्तार अधिकारियों के साथ आत्मा परियोजना और सीड सर्टिफिकेशन से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने कृषि विस्तार अधिकारियों को ई-अटेंडेंस व्यवस्था से मुक्त करने, 25 वर्षों से लंबित 2800 ग्रेड-पे की मांग पूरी करने, अतिरिक्त कृषि केंद्रों का प्रभार संभालने वाले अधिकारियों के मानदेय में बढ़ोतरी और पटवारियों की तर्ज पर एग्रीस्टेक भत्ता देने की मांग उठाई।
कर्मचारियों का कहना है कि कृषि विस्तार अधिकारियों का काम कार्यालयों तक सीमित नहीं है। उनका अधिकांश समय किसानों के खेतों, गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों में बीतता है। ऐसे में निश्चित समय पर कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता से मैदानी कार्य प्रभावित हो सकता है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहन डामोर ने कहा कि कृषि विस्तार अधिकारियों की जिम्मेदारी किसानों के बीच जाकर कृषि योजनाओं की जानकारी देना, फसल प्रदर्शन कराना, मिट्टी परीक्षण और विभागीय गतिविधियों को संचालित करना है। इसके अलावा कई कार्यों का ऑनलाइन डाटा भी दर्ज किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहकर ई-अटेंडेंस दर्ज करना मैदानी कार्यों की प्रकृति को देखते हुए व्यावहारिक नहीं है। डामोर ने कहा कि कई अन्य विभागों के कर्मचारी भी क्षेत्रीय स्तर पर काम करते हैं, लेकिन उनके लिए ऐसी व्यवस्था लागू नहीं है। इसलिए कृषि विस्तार अधिकारियों को भी इससे छूट दी जानी चाहिए।
धरने में संघ ने 2800 ग्रेड-पे की मांग को प्रमुखता से उठाया। डामोर ने कहा कि यह मांग करीब 25 वर्षों से लंबित है। लंबे समय से मांग किए जाने के बाद भी समाधान नहीं होने से अधिकारियों में नाराजगी है।
संघ ने अतिरिक्त कृषि केंद्रों का प्रभार संभालने वाले अधिकारियों के मानदेय में बढ़ोतरी की भी मांग की। संघ के अनुसार वर्तमान में अतिरिक्त केंद्र का प्रभार संभालने वाले अधिकारियों को 500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जिसे बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई है।
कृषि विस्तार अधिकारियों ने पटवारियों की तर्ज पर एग्रीस्टेक भत्ता देने की मांग भी रखी। संघ का कहना है कि अधिकारी फसल प्रदर्शन, मिट्टी परीक्षण और अन्य विभागीय कार्यों से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियां करते हैं, इसलिए तकनीकी कार्यों के लिए उन्हें भी यह भत्ता मिलना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कार्यालयों में सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। संघ ने बताया कि विभाग में करीब 30 से 40 प्रतिशत महिला कृषि विस्तार अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन कई ग्रामीण कार्यालयों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कुछ स्थानों पर शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी होने का दावा किया गया।
संघ का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में मुख्यालय पर सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ई-अटेंडेंस के लिए उपस्थिति अनिवार्य करना कठिनाई पैदा कर सकता है। अधिकारियों ने पहले की तरह दौरा डायरी के आधार पर उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष मोहन डामोर ने बताया कि ई-अटेंडेंस सहित अन्य मांगों को लेकर कृषि मंत्री से चर्चा हुई है। उनके अनुसार मंत्री ने समस्याओं पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए प्रमुख सचिव और विभागीय संचालक को जानकारी देने की बात कही है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि कृषि विस्तार अधिकारियों को ई-अटेंडेंस से परेशानी हो रही है तो उन्हें इससे मुक्त रखने के संबंध में कार्रवाई की जाएगी।
संघ ने कहा कि पिछले पांच-छह महीनों से मांगों को लेकर शासन और विभागीय अधिकारियों से बातचीत की जा रही थी। समाधान नहीं होने के बाद प्रदेश स्तर पर धरना देना पड़ा। संघ ने उम्मीद जताई कि जल्द निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
डामोर ने कहा कि संगठन चाहता है कि मांगों पर शीघ्र फैसला हो, जिससे कृषि विस्तार अधिकारी बिना किसी असमंजस के किसानों से जुड़े अपने मैदानी दायित्वों का निर्वहन कर सकें। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें कर्मचारियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित हो और किसानों से संबंधित फील्ड कार्य भी प्रभावित न हों।















