भोपाल, 21 अगस्त।
मध्यप्रदेश की कृषि उपज मंडियों का दस साल बाद नया वर्गीकरण किया गया है। मंडियों की आय और कृषि उपज आवक के आधार पर किए गए इस वर्गीकरण में 54 मंडियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए उच्च श्रेणी में स्थान हासिल किया है। नए वर्गीकरण से किसानों को मंडी व्यवस्था में बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना के निर्देशन में मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने यह प्रक्रिया पूरी की है। मंडी समितियों का वर्गीकरण वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की औसत कृषि उपज आवक और औसत आय के आधार पर किया गया है।
वर्गीकरण में मंडी शुल्क और लाइसेंस शुल्क से प्राप्त वास्तविक आय को आधार बनाया गया है। प्रदेश में वर्तमान में 259 कृषि उपज मंडी समितियां और 298 उपमंडियां किसानों की सेवा में कार्यरत हैं। वर्ष 2016 के बाद पिछले दस वर्षों में मंडियों की आय, आवक और विपणन गतिविधियों में हुए बदलाव को देखते हुए नया वर्गीकरण किया गया है।
नए वर्गीकरण के तहत प्रदेश की 259 मंडियों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें ए श्रेणी में 47 मंडियां, बी श्रेणी में 63 मंडियां, सी श्रेणी में 81 मंडियां और डी श्रेणी में 68 मंडियां शामिल हैं।
नए वर्गीकरण से मंडी समितियों की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। मंडियों की श्रेणी के अनुसार अधिकारियों और कर्मचारियों के ढांचे में बदलाव, वित्तीय अधिकारों में वृद्धि और कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा सकेंगे।
इससे मंडी क्षेत्रों में किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही विपणन व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। मंडी प्रांगणों में हम्माल, तुलावटी और अन्य आवश्यक लाइसेंस व्यवस्था को बेहतर करने, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने और कृषि उपज के विपणन को आसान बनाने में सहायता मिलेगी।
नवीन वर्गीकरण आदेश 19 अगस्त 2026 से लागू किया गया है। किसानों और मंडी समितियों के हित में यह भी प्रावधान किया गया है कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 31 मार्च 2027 तक किसी भी मंडी समिति को नए वर्गीकरण के कारण पहले से निम्न श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आयुक्त-सह-प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने 19 अगस्त को नवीन वर्गीकरण आदेश जारी किया। इसके बाद 54 मंडियों को बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उच्च श्रेणी में क्रमोन्नति मिली है। वहीं पहले जहां 122 मंडियां डी श्रेणी में थीं, अब यह संख्या घटकर 68 रह गई है।















