पिछले दिनों एक जिले में रहे पूर्व कप्तान साहब, जो अब प्रमोशन पाने के बाद किसी अन्य बड़ी जगह पर पदस्थ हैं, उन्होंने अपना निजी निवास बनवाया। रेत-गिट्टी की मदद तो पूर्व पदस्थापना वाले जिले से भरपूर हो गई, लेकिन नए घर के खिड़की-दरवाजे और फर्नीचर का काम किसी पर भारी पड़ गया।
उत्साह-उत्साह में साहब की मदद करने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला मटेरियल उपलब्ध तो करा दिया, लेकिन अब अन्य बड़े साहब और कुछ माननीयों की तरफ से डिमांड आने लगी, जिसके कारण साहब परेशान हैं।















