उज्जैन, 21 अगस्त।
प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता मनोज जोशी शुक्रवार तड़के मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचे और वहां उन्होंने प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर विधि-विधान से बाबा महाकाल के दर्शन किए। मंदिर में करीब ढाई घंटे तक रुककर रुद्रपाठ सुनने और भस्म आरती के अलौकिक वातावरण का हिस्सा बनने के बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भगवान महाकाल की शक्ति और उनकी अनुभूति को शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है।
फिल्म अभिनेता मनोज जोशी रात करीब तीन बजे ही मंदिर परिसर में पहुंच गए थे और सुबह साढ़े पांच बजे तक वहां उपस्थित रहे। भस्म आरती के समापन के पश्चात मनोज जोशी ने भगवान महाकाल के चरणों में शीश झुकाकर देश तथा समाज के कल्याण की मंगल कामना की। अभिनेता के आगमन पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने उनका स्वागत किया, तथा आरती संपन्न होने के बाद मंदिर समिति की तरफ से उन्हें बाबा महाकाल का प्रसाद और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
रजत मुकुट और त्रिशूल से सुसज्जित बाबा महाकाल का यह स्वरूप अत्यंत मनमोहक था। भस्म आरती के दौरान भगवान का विशेष पूजन और शृंगार किया गया। गर्भगृह के पट खुलने पर भगवान का पंचामृत अभिषेक हुआ और उन्हें रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट तथा अन्य आभूषणों से सजाया गया।
सबसे पहले सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया, जिसके बाद घंटी बजाकर भगवान से अनुमति ली गई और सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए। गर्भगृह के पट खुलने के बाद पुजारियों ने बाबा महाकाल का पिछला शृंगार हटाकर पंचामृत पूजन के उपरांत कर्पूर आरती संपन्न की और नंदी हॉल में नंदीजी का स्नान, ध्यान व पूजन किया गया। भगवान महाकाल का जल से अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन हुआ।
पंचामृत पूजन के पश्चात बाबा महाकाल का भव्य शृंगार किया गया, जिसमें भगवान को भस्म, भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट अर्पित किए गए। इसके साथ ही रजत चंद्र, त्रिशूल और मुकुट धारण कराने के साथ शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल तथा रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। सुगंधित फूलों की माला से भी भगवान को सजाया गया और अंत में फल तथा मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती के इस पावन अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे, जिन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा।















