नई दिल्ली, 21 अगस्त।
दिल्ली की साकेत अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी कुमारी सिंह को भरण-पोषण के लिए हर महीने 30 हजार रुपये देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उनके सभी मेडिकल खर्चों का भुगतान करने का आदेश भी दिया। यह आदेश महिला अदालत की जज छाया त्यागी ने पारित किया।
भानवी कुमारी सिंह ने पति से भरण-पोषण की मांग को लेकर साकेत अदालत में याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने बताया कि वह अपने ससुराल के साझा मकान में नहीं रह रही हैं और पति से अलग दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में रहती हैं। ग्रीन पार्क स्थित मकान की मालकिन भी वह खुद हैं।
याचिका में भानवी सिंह ने आरोप लगाया कि राजा भैया की ओर से उन्हें अब तक गुजारे के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई है। उन्होंने अदालत से अपने जीवन-यापन और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए भरण-पोषण की मांग की थी।
याचिका के अनुसार, भानवी कुमारी सिंह कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि शारीरिक यातना के कारण उनके फेफड़ों में परेशानी हुई है। इसके अलावा लीवर में गांठ और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है।
भानवी सिंह ने बताया कि उनकी मासिक आय करीब छह हजार रुपये है, लेकिन इतनी राशि में इलाज और अन्य आवश्यक खर्च पूरे करना संभव नहीं है।
साकेत अदालत ने राजा भैया को निर्देश दिया है कि वह हर महीने की 10 तारीख तक 30 हजार रुपये भानवी सिंह के बैंक खाते में जमा करें। इसके साथ ही उनके इलाज से जुड़े पूरे खर्च की जिम्मेदारी भी उठाएं।
गौरतलब है कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। वह प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक हैं और अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष हैं।
राजा भैया भदरी रियासत के उत्तराधिकारी हैं। वह वर्ष 1993 से लगातार सात बार कुंडा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत चुके हैं।
राजनीतिक रूप से उनका प्रभाव इतना रहा है कि वह उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों सरकारों में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार के दौरान उन पर कड़ा आतंकवाद निरोधी कानून पोटा लगाया गया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया।
वर्ष 2013 में कुंडा में हुए तत्कालीन डीएसपी जिया-उल-हक हत्याकांड के दौरान भी राजा भैया का नाम चर्चा में आया था। इसके बाद उन्हें अखिलेश यादव सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।















