गुवाहाटी, 21 अगस्त।
असम राज्य में बाढ़ की विभीषिका से जूझे रहे पांच जिलों के 92 गांवों के लगभग 14,799 नागरिक अभी भी इस आपदा की मार झेल रहे हैं। हालांकि, नदियों के जलस्तर में लगातार सुधार आने के बाद अब बाढ़ प्रभावितों का जीवन धीरे-धीरे सामान्य पटरी पर लौटने लगा है और पीड़ित परिवार अपने आवास तथा खेती को फिर से व्यवस्थित करने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर राज्य में बाढ़ से हुए जान-माल के भारी नुकसान तथा चलाए जा रहे राहत एवं पुनर्वास अभियानों की पूरी जानकारी विस्तार से साझा की।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 20 अगस्त तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य की सभी नदियां अब खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं, जबकि इस आपदा की चपेट में आने से अब तक कुल 106 लोगों की जान जा चुकी है। बाढ़ की वजह से सबसे ज्यादा तबाही शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में देखने को मिली है, जहां कुल 3,083 हेक्टेयर कृषि भूमि अभी भी पानी में डूबी हुई है।
इस समय विभिन्न राहत शिविरों में 238 लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 1165 ऐसे लोग राहत सामग्री प्राप्त कर रहे हैं जो शिविरों में नहीं रह रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य सरकार द्वारा गुरुवार को 4 चिकित्सा टीमों को तैनात किया गया है और सरकारी अधिकारी मिलकर हुए नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।















