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उत्तर प्रदेश
21 Aug, 2026

चंपत राय ने जारी की नौ पन्नों की चिट्ठी, राम मंदिर निर्माण और नृपेंद्र मिश्र के योगदान पर किए बड़े खुलासे

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने नौ पन्नों की चिट्ठी जारी कर राम मंदिर निर्माण और नृपेंद्र मिश्र के योगदान से जुड़े कई अहम दावे किए हैं।

अयोध्या, 21 अगस्त।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने गुरुवार को एक बयान के माध्यम से नौ पृष्ठों का विस्तृत पत्र सार्वजनिक किया है, जिसमें उन्होंने कुल 33 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की है। इस पत्र में उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले दावे प्रस्तुत किए हैं तथा यह बताया है कि नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर निर्माण से जुड़े तमाम प्रमुख निर्णय पूरी तरह अपने स्वयं के विवेक से लिए और इस पूरी प्रक्रिया में उन्होंने किसी अन्य के फैसलों को अधिक प्राथमिकता नहीं दी।

चंपत राय ने अपने पत्र में यह दावा किया है कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े नीतिगत एवं ढांचागत फैसलों में मुख्य रूप से नृपेंद्र मिश्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण और सर्वोपरि रही है।

उन्होंने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा राम मंदिर के निर्माण हेतु जिस ट्रस्ट का गठन किया गया था, उसमें 15 ट्रस्टी शामिल थे और इसके अध्यक्ष पद की कमान नृपेंद्र मिश्र को सौंपी गई थी। राय के अनुसार, उन्हीं के प्रमुख सुझावों के आधार पर देश की दिग्गज कंपनी एल एंड टी को मंदिर निर्माण के लिए चुना गया था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न भवनों के निर्माण कार्य के लिए नोएडा की प्रसिद्ध फर्म डिजाइन एसोसिएट (जिसके प्रमुख जय काकतीकर हैं) का चयन भी नृपेंद्र मिश्र द्वारा ही किया गया था।

उन्होंने पत्र में आगे यह भी लिखा है:

यह भी पूर्णतः सत्य है कि नृपेंद्र मिश्र के कुशल मार्गदर्शन और अनथक प्रयासों के कारण पत्थरों से तराशा गया इतना भव्य मंदिर जून 2020 में कोरोना काल की विषम परिस्थितियों के बीच शुरू होकर जून 2026 तक पूरी तरह से समाज को समर्पित हो चुका है। यह अभूतपूर्व सफलता केवल नृपेंद्र मिश्र के दृढ़ संकल्प और प्रयासों का ही प्रत्यक्ष परिणाम है। जब कभी निर्माण कार्य के दौरान कोई अड़चन आई, उन्होंने तुरंत देश के श्रेष्ठतम विशेषज्ञों और विद्वानों से व्यक्तिगत रूप से आग्रह कर उन्हें अयोध्या आमंत्रित किया और उनके बहुमूल्य परामर्श से उन बाधाओं का तत्काल निवारण किया। यह भी एक सच्चाई है कि अधिकांश विद्वानों ने यहां पूरी तरह सेवाभाव से अपने सुझाव दिए हैं और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से इसके एवज में किसी भी प्रकार का पारिश्रमिक स्वीकार नहीं किया है।

राय ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि अनूप मित्तल, जो कभी एनबीसीसी के अध्यक्ष रह चुके हैं, वर्तमान में मंदिर निर्माण समिति के सक्रिय सदस्य भी हैं। वे पेशे से एक कुशल सिविल इंजीनियर हैं और हमेशा इंजीनियरिंग के विषयों पर नृपेंद्र मिश्र के मुख्य सलाहकार की भूमिका में रहे हैं। नृपेंद्र जी के सभी लिखित कार्य अनूप द्वारा ही संपन्न किए जाते थे, जैसे कि निर्माण समिति की बैठकों के विवरण तैयार करना और उन्हें संबंधित व्यक्तियों तक पहुंचाना आदि। अनूप के साथ हमेशा एक युवा सिविल इंजीनियर यश मित्तल भी उपस्थित रहते थे, जो तुरंत अपने लैपटॉप पर हर विषय को टाइप कर लेते थे और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सारे कार्य आगे बढ़ते थे, जो कि बेहद सराहनीय है और वे इसके लिए उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय मूल रूप से उत्तर प्रदेश सरकार के स्वामित्व की संपत्ति है। नृपेंद्र मिश्र के मन में यह विचार आया कि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी अपना एक अलग संग्रहालय स्थापित करना चाहिए, किंतु एक छोटे से कस्बे में दो अलग-अलग संग्रहालय होना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं था। इसलिए उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा की, जिसे सरकार ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

इसके उपरांत उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मध्य एक औपचारिक लिखित अनुबंध हुआ, जिसके तहत यह संग्रहालय भवन 30 वर्षों की लंबी अवधि के लिए ट्रस्ट को लीज पर प्राप्त हो गया। जब इस भवन का निरीक्षण किया गया तो यह अनुभव किया गया कि इसका पूर्ण जीर्णोद्धार किया जाना अनिवार्य है। नृपेंद्र मिश्र ने इस संग्रहालय के संपूर्ण कायापलट और देखभाल के कार्य के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय से सेवानिवृत्त संजीब सिंह का चयन किया, जो तुरंत अयोध्या पहुंचे और उन्होंने सभी कार्यों की बागडोर अपने हाथों में संभाल ली।

राय के अनुसार, वास्तुकार जय काकतीकर ने इस पूरे प्रोजेक्ट का ड्राइंग तैयार किया, जिसके बाद जीर्णोद्धार का कार्य उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को सौंप दिया गया, जबकि इंजीनियर इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) को इस पूरे निर्माण और जीर्णोद्धार कार्य की देखभाल का जिम्मा दिया गया। संजीब सिंह ने संग्रहालय के भीतर कुल 20 आधुनिक गैलरियों की रूपरेखा तैयार की है। ट्रस्ट के अध्यक्ष मिश्र ने इसके कुछ विशेष कार्यों को विकसित करने और उन्हें संग्रहालय में स्थापित करने की जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास को सौंपी है, जिन्होंने अयोध्या आकर कार्य का शुभारंभ कर दिया है। वर्तमान में मंदिर निर्माण समिति की मासिक बैठकों के साथ-साथ इस संग्रहालय से जुड़े विशिष्ट कार्यों के लिए भी नृपेंद्र मिश्र संबंधित सभी विशेषज्ञों के साथ नियमित बैठकें कर रहे हैं, और इन निरंतर प्रयासों के चलते यह पूरी संभावना है कि दिसंबर 2027 तक यह संग्रहालय आम जनता के दर्शन के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।

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आज का राशिफल

व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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