नई दिल्ली, 21 अगस्त।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए द्वारा अपनी उत्तर कुंजी (आंसर की) आपत्ति प्रणाली पर उठ रहे सवालों का कड़ा जवाब दिया गया है। एजेंसी ने यह स्पष्ट किया है कि यह ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी तरह से विद्यार्थियों के हित में और न्यायसंगत है, तथा इस पर लगाए जा रहे महंगे होने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। मुख्य विषय यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे जेईई मेन, नीट या यूजीसी नेट) की प्रोविजनल उत्तर कुंजी में अशुद्धियों पर आपत्ति जताने की प्रक्रिया को लेकर जो असमंजस था, उस पर एनटीए ने अपनी स्थिति साफ कर दी है।
एजेंसी ने अपने आधिकारिक बयान में यह महत्वपूर्ण निर्णय साझा किया है कि यदि परीक्षा में बैठने वाला कोई एक अकेला परीक्षार्थी भी किसी प्रश्न को लेकर चुनौती देता है और विषय विशेषज्ञों द्वारा उस आपत्ति को स्वीकार कर लिया जाता है, तो सुधारी गई नई उत्तर कुंजी उस परीक्षा में शामिल होने वाले प्रत्येक छात्र के लिए लागू होगी।
इसके साथ ही, फीस (शुल्क) के प्रावधान को लेकर एजेंसी ने यह निर्णय लिया है कि प्रति प्रश्न 200 रुपये का यह शुल्क इसलिए रखा गया है ताकि अनावश्यक और फर्जी आपत्तियों पर लगाम लगाई जा सके, न कि इससे कोई मुनाफा कमाने का उद्देश्य है। यदि किसी परीक्षार्थी की चुनौती जांच में सही पाई जाती है, तो वह राशि पूरी तरह वापस रिफंड (लौटा) दी जाती है। इस पूरी प्रणाली का मूल उद्देश्य यही है कि किसी भी एक छात्र द्वारा दर्ज कराई गई सटीक आपत्ति से लाखों अन्य विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम के रिकॉर्ड को समय रहते सुधारा जा सके।















