प्रयागराज, 22 अगस्त।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के यूरोलॉजी विभाग के कुशल चिकित्सकों ने गंभीर रूप से बीमार पहुंचे चालीस वर्षीय एक मरीज की बाईं किडनी का बेहद जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा करते हुए एक साथ कुल सैंतीस पथरियां बाहर निकालकर उसे जीवन की एक नई उम्मीद प्रदान की है, और यह कठिन शल्य प्रक्रिया कल शुक्रवार को एसआरएन अस्पताल के पीएमएसएसवाई यूरोलॉजी ऑपरेशन थिएटर में संपन्न की गई। मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित मरीज की दोनों ही किडनियों में बहुत बड़ी-बड़ी पथरियां थीं तथा गंभीर संक्रमण फैल जाने की वजह से उसकी शारीरिक स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी, जिसके बारे में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉक्टर दिलीप चौरसिया ने शनिवार को विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला सचमुच बेहद जटिल था। स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के सह आचार्य डॉक्टर संतोष सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश के रीवा जिले के पनासी गांव निवासी शत्रुघ्न पिछले लगभग एक वर्ष से दोनों किडनियों में पथरी की भयंकर समस्या से जूझ रहा था, और परिजनों के मुताबिक वह इस बीमारी के इलाज के वास्ते विभिन्न आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथिक दवाइयां ले रहा था, लेकिन करीब एक महीना पहले अचानक उसे तेज बुखार आने के साथ ही सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी।
हालत बद से बदतर होने पर उसे तुरंत स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय लाया गया, जहां डॉक्टरों ने तमाम जरूरी जांच के बाद उसकी स्थिति को गंभीर संक्रमण यानी सेप्सिस और किडनी फेल्योर के मुहाने पर पाया, जिसके तुरंत बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और तीन दिनों तक लगातार वेंटिलेटर पर रखने के दौरान उसका हेमोडायलिसिस भी किया गया। जब मरीज की हालत में कुछ सुधार दर्ज किया गया तब उसे नियमित डायलिसिस पर रखा गया, और एक्स-रे व अन्य जांचों के दौरान उसकी दोनों किडनियों में साढ़े चार से लेकर छह सेंटीमीटर तक की भारी-भरकम पथरियां पाई गईं, जबकि ऑपरेशन के वक्त उसका सीरम क्रिएटिनिन का स्तर चार दशमलव दो दर्ज किया गया।
मरीज की इस अत्यंत गंभीर दशा को देखते हुए यूरोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने पहले उसकी बाईं किडनी का ऑपरेशन करने का साहसिक निर्णय लिया, जिसके तहत इक्कीस अगस्त को एनाट्रॉफिक पायलोलिथोटॉमी की गई और इस विशेष प्रक्रिया के जरिए किडनी को नियंत्रित तरीके से खोलकर एक-एक करके सभी सैंतीस पथरियों को बाहर निकाला गया तथा बाद में किडनी की बेहतरीन मरम्मत कर पांच बाई छब्बीस का डबल-जे स्टेंट भी डाल दिया गया, तथा ऑपरेशन के दौरान करीब बीस मिनट तक रीनल आर्टरी को नियंत्रित रूप से क्लैंप करके रखा गया। यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर दिलीप चौरसिया ने जोर देकर कहा कि इतनी गंभीर अवस्था में इस प्रकार का मेजर ऑपरेशन करना अस्पताल के लिए एक बड़ी चुनौती थी, और अब पूरी टीम मरीज की सेहत पर लगातार कड़ी निगरानी रख रही है।















