नई दिल्ली, 22 अगस्त।
देश में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष योजना को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त 2026 तक इस व्यवस्था के माध्यम से कुल 72.85 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है। इसमें सबसे बड़ा योगदान एफसीएनआर (बी) जमा का रहा है। इस माध्यम से अकेले 65.397 अरब डॉलर प्राप्त हुए हैं। यानी अब तक जुटाई गई कुल विदेशी मुद्रा में करीब 90 प्रतिशत हिस्सा एफसीएनआर (बी) जमा से आया है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके तहत विदेशी मुद्रा जुटाने की सुविधा 31 अगस्त 2026 को समाप्त होने वाली है।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, एफसीएनआर (बी) जमा के अतिरिक्त विदेशों से विदेशी मुद्रा उधारी के जरिए करीब 4.86 अरब डॉलर और बाहरी वाणिज्यिक उधारी के माध्यम से करीब 2.591 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। इन तीनों माध्यमों से प्राप्त राशि को जोड़ने पर कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह 72.85 अरब डॉलर पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि केंद्रीय बैंक की इस विशेष योजना में एफसीएनआर (बी) जमा ने सबसे अहम भूमिका निभाई है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों और बैंकों की भागीदारी ने देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने में मदद की है।
दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में विशेष डॉलर-रुपया विनिमय सुविधा शुरू की थी। इसका उद्देश्य देश में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने के साथ उस समय रुपये पर बने दबाव को कम करना था। इस योजना के तहत एफसीएनआर (बी) जमा के लिए सुविधा 31 अगस्त तक खुली है। वहीं, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशों से विदेशी मुद्रा उधारी से जुड़े विकल्प 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेंगे। इस व्यवस्था के जरिए बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया गया, जिससे भारतीय वित्तीय प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता मजबूत हो सके।
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल में उम्मीद जताई थी कि केंद्रीय बैंक की इन पहलों से कम से कम 80 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित किया जा सकता है। 21 अगस्त तक 72.85 अरब डॉलर जुटने के बाद यह लक्ष्य अब काफी करीब दिखाई दे रहा है। गवर्नर ने एफसीएनआर (बी) सुविधा को तय समय से एक महीने पहले बंद करने के फैसले को नीतिगत बदलाव के बजाय आंकड़ों के आधार पर किया गया समायोजन बताया था। उनका कहना था कि हर अतिरिक्त डॉलर को विनिमय करने से मिलने वाला लाभ धीरे-धीरे कम होता जा रहा था।
इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जुटाए जाने के बावजूद रुपये में वर्ष 2013 जैसी तेज मजबूती देखने को नहीं मिली है। रुपया व्यापक रूप से उन स्तरों के आसपास बना हुआ है, जहां 5 जून को रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के उपायों की घोषणा की थी। इसके बावजूद बैंकिंग प्रणाली के जरिए करीब 72.85 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटना भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे देश के विदेशी मुद्रा संसाधनों और वित्तीय प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता को सहारा मिल सकता है।
अब बाजार की नजर 31 अगस्त की एफसीएनआर (बी) समयसीमा पर है। इस तारीख के बाद इस सुविधा के तहत नए जमा जुटाने का रास्ता बंद हो जाएगा। हालांकि, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशों से विदेशी मुद्रा उधारी के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाने की प्रक्रिया दिसंबर 2026 के अंत तक जारी रहेगी। ऐसे में रिजर्व बैंक की विशेष व्यवस्था से अब तक जुटाई गई राशि देश की वित्तीय व्यवस्था में डॉलर की उपलब्धता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।















