नई दिल्ली, 22 अगस्त।
अभिनेता राजेश कुमार ने वर्ष 2017 में अभिनय से दूरी बनाकर अपने गृह नगर गया, बिहार में खेती शुरू करने का फैसला लिया था। यह निर्णय उन्होंने आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु से हुई कई मुलाकातों और उनकी शिक्षाओं से प्रभावित होकर लिया। हालांकि, खेती के दौरान उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा और करीब पांच वर्षों में उन पर दो करोड़ रुपये का कर्ज हो गया। इसके बावजूद राजेश इसे अपनी असफलता नहीं मानते हैं।
राजेश ने बताया कि शुरुआत में वह सद्गुरु की बातों के अनुयायी नहीं थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी शिक्षाओं से प्रभावित हुए। वह ईशा फाउंडेशन के कई कार्यक्रमों से भी जुड़े और सद्गुरु के ‘रैली फॉर रिवर्स’ अभियान में कार्यक्रमों की मेजबानी की। इस दौरान कही गई एक बात ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने खेती को करीब से समझने का निर्णय लिया।
राजेश के अनुसार, उन्होंने महसूस किया कि किसानों को खेती में रसायनों के इस्तेमाल से बचने की सलाह देने के बजाय उन्हें खुद किसान बनकर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने बागवानी शुरू की। हालांकि, शुरुआती प्रयास बुरी तरह असफल रहे, लेकिन उनका कहना है कि इस अनुभव से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला।
खेती के दौरान राजेश को लगातार कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने पौधारोपण शुरू किया, लेकिन करीब 35 वर्षों बाद उस इलाके में आई बाढ़ ने उनकी पूरी मेहनत तबाह कर दी। इसके बाद उन्होंने 15 हजार और पेड़ लगाए, लेकिन कोविड-19 महामारी ने उनकी योजनाओं को प्रभावित कर दिया।
महामारी के बाद उन्होंने दोबारा पेड़ लगाए। इस बार इलाके में जलस्तर गायब होने से उनकी मुश्किल बढ़ गई। उन्होंने बोरवेल के लिए करीब 500 फीट तक खुदाई कराई, लेकिन वहां पानी की एक बूंद भी नहीं मिली। इन परिस्थितियों में उनका काफी पैसा खर्च हुआ और आमदनी का कोई स्थायी स्रोत नहीं रहा।
राजेश ने कहा कि आध्यात्मिकता ने उन्हें कठिन दौर में शांत बनाए रखा। उनके मुताबिक, लगातार नुकसान के बावजूद वह चिंता, निराशा, हताशा या गुस्से में नहीं गए। उनके प्रयास और प्रक्रिया जारी रही और उन्होंने परिस्थितियों को सफलता या असफलता के नजरिए से देखना छोड़ दिया।
खेती के कारोबार में शुरुआती वर्षों के दौरान राजेश पर करीब दो करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। उन्होंने बताया था कि आमदनी नहीं हो रही थी और बची हुई सारी रकम खर्च हो चुकी थी। एक समय उन्हें आर्थिक रूप से दिवालिया होने जैसा महसूस हुआ और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पैसे जुटाना मुश्किल हो गया था।
हालांकि, बाद में उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया। अप्रैल में उन्होंने बताया था कि कर्ज घटकर करीब 20 लाख रुपये रह गया है और वह आर्थिक संकट के उस दौर से काफी हद तक बाहर निकल चुके हैं।
राजेश कुमार को 2000 के दशक के लोकप्रिय धारावाहिक ‘सराभाई वर्सेज सराभाई’ में रोशेश की भूमिका के लिए खास पहचान मिली थी। हाल के वर्षों में वह ‘सैयारा’, ‘है जवानी तो इश्क होना है’, ‘ओह माय डॉग’ और ‘निशानची’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए हैं।















