वाराणसी, 22 अगस्त।
भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ में शनिवार को भारत और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे बौद्ध और सांस्कृतिक संबंधों की झलक देखने को मिली। जापान के यामानाशी प्रांत के राज्यपाल कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में 75 सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल ने सारनाथ का भ्रमण किया। दल में राज्यपाल की पत्नी भी शामिल थीं। प्रतिनिधिमंडल ने धामेक स्तूप, चौखंडी स्तूप और भगवान बुद्ध से जुड़े अन्य प्रमुख स्थलों की ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक विरासत को करीब से जाना।
सारनाथ को हाल ही में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा खास महत्व रखता है। इस मान्यता के साथ सारनाथ देश का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से उत्तर प्रदेश के बौद्ध पर्यटन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।
सारनाथ की वैश्विक पहचान मजबूत होने से बौद्ध परंपरा से जुड़े जापान जैसे देशों के पर्यटकों के यहां आने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। इससे प्रदेश में बौद्ध पर्यटन को गति मिलने और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थलों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।
जापानी प्रतिनिधिमंडल के काशी पहुंचने पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से उत्तर प्रदेश की बौद्ध पर्यटन पहचान को वैश्विक मजबूती मिली है। उन्होंने यामानाशी प्रांत के प्रतिनिधिमंडल के दौरे को भारत-जापान के पुराने बौद्ध एवं सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
जयवीर सिंह ने कहा कि इस तरह के दौरों से जापान के अधिक पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत, ऐतिहासिक स्थलों और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराने में मदद मिलेगी। इससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क और पर्यटन संबंधों को आगे बढ़ाने के नए अवसर भी बनेंगे।
प्रतिनिधिमंडल की सदस्य युमी साइटो ने सारनाथ की यात्रा को विशेष अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद इस पवित्र स्थल पर आना और भी खास रहा। भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़े स्थानों के दर्शन और धामेक तथा चौखंडी स्तूप को करीब से देखना भारत-जापान के साझा आध्यात्मिक संबंधों को महसूस करने जैसा रहा।
जापानी दल ने नमो घाट पर गंगा आरती भी देखी। गंगा तट पर बाढ़ के बीच मंत्रोच्चार और आरती के आध्यात्मिक वातावरण ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को प्रभावित किया। उन्होंने काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की तथा नमो घाट पर तस्वीरें खींचकर यात्रा की यादों को कैमरे में कैद किया।















