नई दिल्ली, 22 अगस्त।
नई दिल्ली के रशियन सेंटर ऑफ साइंस एंड कल्चर में आगामी नौ अक्टूबर को 34वीं राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता, 10वें सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार और 14वीं चित्रकला प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसकी आधिकारिक जानकारी राजस्थानी अकादमी के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता द्वारा दी गई है।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राजस्थानी लोक नृत्य प्रतियोगिता के जरिए राजस्थान के विभिन्न अंचलों की लोकनृत्य परंपराओं को देश की राष्ट्रीय राजधानी के मंच पर जीवंत रूप से प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर मिलेगा, जहां कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान की बहुरंगी लोक संस्कृतियों, पारंपरिक वेशभूषाओं, लोकधुनों और पारंपरिक नृत्य शैलियों की अनूठी छटा बिखेरेंगे। इस सांस्कृतिक महाकुंभ से दिल्ली में रह रहे प्रवासी राजस्थानी परिवारों के साथ-साथ अन्य राज्यों से ताल्लुक रखने वाले कला प्रेमियों को भी राजस्थान की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को बेहद करीब से जानने और समझने का मौका मिल पाएगा।
इसी अवसर पर आयोजित होने वाली चौदहवीं राजस्थानी चित्रकला प्रतियोगिता में भी तमाम उभरते कलाकार राजस्थान के लोकजीवन, ग्रामीण परिवेश, लोकदेवताओं, मेलों-त्योहारों और सांस्कृतिक धरोहर को अपनी कला के रंगों के जरिए सीधे कैनवास पर उकेरेंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य युवा और प्रतिभावान चित्रकारों को प्रोत्साहित करना तथा राजस्थानी कला की विशिष्ट शैली को एक व्यापक मंच मुहैया कराना है। इसके अलावा सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार के माध्यम से समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली उन चुनिंदा प्रतिभाओं तथा व्यक्तित्वों को सम्मानित करने की शानदार परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है, जो अपने माता-पिता की पूर्ण रूप से निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। राजस्थानी लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को देश की राजधानी में युवा पीढ़ी तक पहुंचाने तथा प्रवासी राजस्थानियों को उनकी अपनी माटी की खुशबू से जोड़ने के पवित्र उद्देश्य से यह आयोजन हर साल प्रतिवर्ष किया जाता है, क्योंकि राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति दुनिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। लोकनृत्य, लोकसंगीत, चित्रकला और पारंपरिक कलाएं हमेशा से ही राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की सबसे जीवंत अभिव्यक्ति मानी जाती हैं।















