भोपाल, 22 अगस्त।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बागसेवनिया थाना इलाके में स्थित विद्यानगर के दीपशिखा हॉस्पिटल में गत शुक्रवार की देर रात अचानक इमरजेंसी वार्ड के भीतर आग भड़क उठने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग की यह दुर्घटना इमारत के भूतल पर यानी ग्राउंड फ्लोर पर पेश आई थी, लेकिन इसका घना धुआं बहुत तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गया, जिसकी सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस फौरन मौके पर पहुंची और दमकल विभाग को इत्तला दी जिसके बाद सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर पास के सहारा अस्पताल में शिफ्ट कराया गया।
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सबसे बड़ी गनीमत यह रही कि इस भयानक हादसे में किसी भी मरीज, अस्पताल के कर्मी या अन्य किसी व्यक्ति के हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई है। पुलिस ने ब्योरा देते हुए बताया कि अस्पताल के बाहर अपनी ड्यूटी दे रहे पुलिसकर्मियों ने जब परिसर से धुआं निकलते देखा तो उन्होंने बिना किसी देरी के अस्पताल के स्टाफ को इसकी जानकारी दी, जिसके तुरंत बाद थाने से एएसआई वीर मणि पांडे अन्य पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे। जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय अस्पताल के भीतर कुल इक्कीस मरीज उपचाराधीन थे जिनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना पुलिस और अस्पताल प्रबंधन के आगे एक बड़ी चुनौती बन गया था, क्योंकि इनमें आईसीयू के पांच-छह गंभीर मरीज और सिजेरियन प्रसव के बाद भर्ती महिलाएं भी शामिल थीं। हालात की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए सबसे पहले सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का रेश्क्यू अभियान प्रारंभ कर दिया। आग ग्राउंड फ्लोर स्थित इमरजेंसी रूम में लगी थी और बिजली गुल होने के कारण लिफ्ट का इस्तेमाल करना पूरी तरह असंभव हो चुका था, जिसके चलते पुलिस और अस्पताल के अमले ने मिलकर सीढ़ियों के जरिए ही मरीजों को बाहर निकाला।
करीब पंद्रह पुलिसकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डाले बिना लगातार बचाव कार्य में जुटे रहकर एक-एक मरीज को बाहर निकाला और सीढ़ियों वाले हिस्से में खिड़कियां तथा पर्याप्त जगह होने के कारण धुआं ऊपर की तरफ निकल गया जिससे राहत मिली। शुरुआती पुलिस तफ्तीश में इस भीषण आग के लगने की वजह शॉर्ट सर्किट आंकी जा रही है, जो कि ग्राउंड फ्लोर पर डॉक्टर्स के बैठने के स्थान के पास लगे एक बिजली के बोर्ड में हुई थी। इस बोर्ड के नजदीक प्लाईवुड की अलमारियां और अन्य सामान रखे होने के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया और रात करीब 10:35 बजे सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों ने लगभग 11 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। संयोगवश घटना के समय ड्यूटी बदलने का वक्त होने के कारण मौके पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था जिन्होंने तत्परता दिखाते हुए एक बड़ा हादसा टाल दिया, हालांकि इस दुर्घटना ने एक बार फिर से तमाम अस्पतालों की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।















