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संपादकीय
22 Aug, 2026

भ्रष्टाचार रोकने रेलवे में बड़े बदलाव, चयन के लिए अब पोर्टल पर आवेदन, परीक्षा अनिवार्य

भारतीय रेलवे ने कंस्ट्रक्शन विंग में अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति के लिए ऑनलाइन आवेदन, परीक्षा और प्रदर्शन मूल्यांकन आधारित नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

नई दिल्ली, 22 अगस्त।

नई व्यवस्था : स्पेशल पोर्टल से होगी भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया पारदर्शी

भारतीय रेलवे ने कंस्ट्रक्शन विंग में अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अब कंस्ट्रक्शन विंग में काम करने के इच्छुक अधिकारियों को रेलवे के स्पेशल पोर्टल पर आवेदन करना होगा और इसके बाद लिखित परीक्षा तथा इंटरव्यू से गुजरना होगा। इसके साथ ही पांच साल के कार्यकाल के बाद हर अधिकारी का मूल्यांकन भी किया जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर ही आगे की तैनाती तय होगी। रेल मंत्रालय का मानना है कि इस नई प्रक्रिया से कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी और काम की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

पिछले कुछ समय से रेलवे के बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी और अधिकारियों की कमी की शिकायतें सामने आ रही थीं। खासकर दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में काम करने के लिए अधिकारी तैयार नहीं होते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए रेलवे ने यह नई नीति बनाई है, जिसके तहत चयन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत कंस्ट्रक्शन विंग में काम करने के लिए अधिकारियों को सबसे पहले रेलवे के स्पेशल पोर्टल पर अपना आवेदन जमा करना होगा। आवेदन के साथ उन्हें अपना सेवा रिकॉर्ड, योग्यता और पिछले काम का अनुभव भी अपलोड करना होगा। आवेदन जमा करने के बाद उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा देनी होगी। यह परीक्षा तकनीकी ज्ञान, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और रेलवे से जुड़े नियमों पर आधारित होगी। लिखित परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। साक्षात्कार में उनके अनुभव, समस्या समाधान की क्षमता और फील्ड में काम करने की इच्छा को परखा जाएगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेरिट के आधार पर अधिकारियों को कंस्ट्रक्शन विंग में तैनात किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया से योग्य और इच्छुक अधिकारियों को ही मौका मिलेगा और मनमानी भर्ती पर रोक लगेगी।

नई नीति की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंस्ट्रक्शन विंग में तैनात हर अधिकारी का हर पांच साल बाद मूल्यांकन किया जाएगा। यह मूल्यांकन उसके द्वारा पूरे किए गए प्रोजेक्ट्स, काम की गुणवत्ता, समय पर काम पूरा करने और टीम मैनेजमेंट के आधार पर होगा। यदि किसी अधिकारी का प्रदर्शन अच्छा रहा तो उसे आगे भी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स दिए जाएंगे और पदोन्नति में प्राथमिकता मिलेगी। वहीं, यदि किसी अधिकारी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा तो उसे कंस्ट्रक्शन विंग से हटाकर दूसरे विभाग में भेजा जा सकता है। रेलवे का कहना है कि इस व्यवस्था से अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ेगी और वे प्रोजेक्ट्स को गंभीरता से लेंगे। पहले ऐसा होता था कि एक बार तैनाती होने के बाद अधिकारियों का कोई मूल्यांकन नहीं होता था, जिससे काम में लापरवाही बढ़ जाती थी।

रेलवे ने यह भी तय किया है कि जो अधिकारी पहाड़, जंगल और दूरदराज के इलाकों में कंस्ट्रक्शन का काम करेंगे, उन्हें विशेष सुविधाएं और प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इन क्षेत्रों में काम करना कठिन होता है, इसलिए सरकार ऐसे अधिकारियों को आवास भत्ता, अतिरिक्त छुट्टियां और पदोन्नति में वेटेज देने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही इन इलाकों में तैनात अधिकारियों के परिवारों के लिए भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे बिना किसी चिंता के काम कर सकें। रेलवे का मानना है कि प्रोत्साहन मिलने से अधिक से अधिक अधिकारी दुर्गम क्षेत्रों में जाने के लिए तैयार होंगे और वहां चल रहे प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी।

पहले कंस्ट्रक्शन विंग में अधिकारियों की तैनाती ज्यादातर प्रशासनिक आधार पर होती थी। कई बार अनुभव और योग्यता को नजरअंदाज कर दिया जाता था, जिसके कारण प्रोजेक्ट्स में देरी होती थी। साथ ही दूरदराज के इलाकों में कोई भी अधिकारी जाना नहीं चाहता था, क्योंकि वहां सुविधाओं की कमी और करियर में आगे बढ़ने के अवसर कम थे। इस वजह से कई बड़े रेल प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पा रहे थे। जमीन अधिग्रहण से लेकर तकनीकी दिक्कतों तक हर स्तर पर अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही थी। नई व्यवस्था में इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखकर बदलाव किए गए हैं।

चयनित अधिकारियों को कंस्ट्रक्शन विंग में भेजने से पहले विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण दो से तीन सप्ताह का होगा और इसमें प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, नई तकनीक, सुरक्षा मानक और फील्ड में आने वाली चुनौतियों से निपटने की जानकारी दी जाएगी। रेलवे अकादमी और क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्रों में यह ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को वास्तविक प्रोजेक्ट साइट पर भी ले जाया जाएगा, ताकि वे जमीनी हकीकत को समझ सकें। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण से अधिकारियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बेहतर तरीके से काम कर पाएंगे।

रेल मंत्रालय का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। स्पेशल पोर्टल के जरिए आवेदन से लेकर चयन तक हर प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे किसी भी प्रकार की सिफारिश और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी। पांच साल का मूल्यांकन सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि अधिकारी लगातार अच्छा प्रदर्शन करें और जनता के पैसे से बनने वाले प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हों। साथ ही दुर्गम क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन देने से क्षेत्रीय असंतुलन भी कम होगा।

रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कंस्ट्रक्शन विंग में काम का दबाव बहुत अधिक होता है और योग्य लोगों के अभाव में प्रोजेक्ट्स अटक जाते हैं। नई व्यवस्था से योग्य और इच्छुक लोगों को मौका मिलेगा। हालांकि कुछ अधिकारियों का मानना है कि केवल परीक्षा और इंटरव्यू से ही योग्यता तय नहीं हो सकती। फील्ड का अनुभव भी उतना ही जरूरी है। इसलिए चयन प्रक्रिया में व्यावहारिक परीक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए।

रेलवे में कंस्ट्रक्शन विंग के लिए लागू की गई यह नई व्यवस्था एक बड़ा सुधार है। ऑनलाइन आवेदन, पारदर्शी चयन, नियमित मूल्यांकन और दुर्गम क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन चारों मिलकर ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं, जिससे रेलवे के बड़े प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी और काम की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। देशभर में रेलवे के सैकड़ों प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनमें हाई स्पीड कॉरिडोर, नई रेल लाइन और स्टेशनों का पुनर्विकास शामिल है। इन सभी को समय पर पूरा करने के लिए कुशल और समर्पित अधिकारियों की जरूरत है। नई नीति उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस योजना को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि इसे सही तरीके से अमल में लाया गया तो निश्चित रूप से भारतीय रेलवे के कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होगा।

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