भोपाल, 22 अगस्त।
कोविड-19 महामारी के दौरान मध्यप्रदेश में सेवानिवृत्त हुए शासकीय कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण में केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ते का लाभ देने की मांग तेज हो गई है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस संबंध में प्रदेश सरकार से प्रभावित कर्मचारियों के लाभों की पुनर्गणना कर आर्थिक नुकसान की भरपाई करने की मांग की है।
एसोसिएशन ने प्रदेश के मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर आवश्यक कार्यपालिक आदेश जारी करने की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि कोविड काल में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की दरों में अंतर के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने बताया कि कोविड-19 के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की अतिरिक्त किस्तों को अस्थायी रूप से रोक दिया था। इसी अवधि में जनवरी 2020 से जून 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बाद में अलग व्यवस्था करते हुए ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण की गणना में निर्धारित दरों का लाभ दिया गया।
संगठन के अनुसार, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 7 सितंबर 2021 को परिपत्र जारी कर संबंधित अवधि के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित महंगाई भत्ते की दरों के आधार पर लाभ देने की व्यवस्था की थी। एसोसिएशन का कहना है कि मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को भी इसी आधार पर लाभ मिलना चाहिए।
एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश में जनवरी 2020 से सितंबर 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण की गणना केवल 12 प्रतिशत महंगाई भत्ते के आधार पर की गई। इससे उन्हें वास्तविक देय राशि की तुलना में नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि समान परिस्थितियों में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के साथ अलग व्यवहार उचित नहीं है। सरकार को इस विसंगति को दूर कर प्रभावित कर्मचारियों के हित में निर्णय लेना चाहिए।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण कर्मचारियों के महत्वपूर्ण वित्तीय अधिकार होते हैं। यदि महंगाई भत्ते की कम दर के कारण राशि कम मिली है तो शासन को इस मामले पर सकारात्मक विचार करना चाहिए।
भोपाल जिले के अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने बताया कि संगठन पहले भी कई बार शासन को इस संबंध में ज्ञापन दे चुका है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय की व्यवस्था के अनुरूप मध्यप्रदेश के कोविड अवधि में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी राहत दी जाए।
एसोसिएशन का तर्क है कि केंद्र और राज्य कर्मचारियों के बीच केवल सेवा क्षेत्र के आधार पर अंतर नहीं होना चाहिए, क्योंकि दोनों ही वर्गों की सेवानिवृत्ति कोविड महामारी के कठिन दौर में हुई थी। संगठन ने सरकार से ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण की दोबारा गणना कर अंतर राशि का जल्द भुगतान करने की मांग की है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वित्त विभाग से स्पष्ट प्रक्रिया तय करने और आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है, ताकि पात्र कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने कहा कि संगठन का उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि प्रभावित सेवानिवृत्त कर्मचारियों को न्यायसंगत वित्तीय लाभ दिलाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले में जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर कर्मचारियों को राहत प्रदान करेगी।















