गुवाहाटी, 22 अगस्त।
असम के तमाम इलाकों में बाढ़ का पानी घटने के साथ ही जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है, मगर शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव, धेमाजी और कछार जिलों में आपदा का यह संकट अब भी पूरी तरह बरकरार है। इन छह जिलों के कुल तिहत्तर गांवों के पंद्रह हजार से ज्यादा लोग वर्तमान में भी इस विपदा से जूझ रहे हैं, जहां प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत और बचाव के काम में पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा साझा किए गए ताजा आंकड़ों से यह साफ होता है कि हालांकि सभी नदियां अब अपने खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन इस बार के भयानक जलप्रलय में अपनी जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 106 तक जा पहुंचा है।
इस प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा तबाही शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में देखने को मिली है, जहां कुल तेरह राजस्व मंडलों के दर्जनों गांव और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि अभी भी पानी में डूबी हुई है। प्रभावित जनता की सहायता के लिए राज्य सरकार की तरफ से कुल पांच राहत शिविर और तीन वितरण केंद्र समेत आठ शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां सैकड़ों लोग शरण लिए हुए हैं और हजारों लोग अन्य माध्यमों से जरूरी सामग्री प्राप्त कर रहे हैं। बाढ़ के इस भयंकर प्रकोप के बीच मवेशियों पर भी भारी संकट आया है और बड़ी संख्या में बेजुबान जानवर प्रभावित हुए हैं, जिनकी देखभाल के लिए सरकार की ओर से पशुओं के चारे के साथ-साथ मेडिकल टीमों को भी तैनात किया गया है।
पीड़ितों के बीच सरकार की तरफ से चावल, दाल, नमक, सरसों का तेल और पशु आहार जैसी जरूरी राहत सामग्री का बड़े पैमाने पर वितरण किया जा रहा है, जबकि क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और बुनियादी ढांचे का आकलन कर आर्थिक मदद भी पहुंचाई जा रही है। राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा लगातार उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने दिल्ली में प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर राज्य के हालात की विस्तृत जानकारी दी है।















