भोपाल, 24 अगस्त।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल, जंगल, वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को प्रकृति ने समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता का अनमोल उपहार दिया है, जिसकी सुरक्षा वनकर्मी पूरी प्रतिबद्धता से कर रहे हैं। सरकार अब वन प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पदोन्नति के बाद रिक्त हुए पदों को भरने के लिए नई भर्ती के आदेश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री सोमवार को भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में वन विभाग के पदोन्नत अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा आयोजित आभार एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामनिवास रावत भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पदोन्नति प्राप्त अधिकारियों-कर्मचारियों को स्टार लगाए और उन्हें बधाई दी।
डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सुशासन को प्राथमिकता दी जा रही है। हर क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति शासकीय सेवक की मेहनत, समर्पण और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान है। वन विभाग के कुल 4,506 शासकीय सेवकों को पदोन्नति दी गई है। विभाग में 25,389 पद स्वीकृत हैं और वर्तमान में 18 हजार से अधिक कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने वन विभाग के मैदानी अमले को प्रकृति पुत्र और हरित सैनिक बताते हुए कहा कि उनके बीच आकर उन्हें प्रसन्नता हुई। मध्यप्रदेश को समृद्ध जैव विविधता की विरासत मिली है और वनकर्मियों के प्रयासों से प्रदेश वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उदाहरण बना है। प्रदेश को टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट, घड़ियाल स्टेट, गिद्ध स्टेट और चीता स्टेट के रूप में पहचान मिली है।
पदोन्नति पाने वालों में 188 सहायक वन संरक्षक, 2,821 वनपाल, 761 उप वन क्षेत्रपाल और अन्य संवर्ग के 736 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी पदोन्नत कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके परिवारों के सहयोग और त्याग के लिए भी आभार जताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। प्रदेश के जंगलों में भैंसों की वापसी भी हुई है। वनकर्मी जंगल, पहाड़, नदियों और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी की जरूरतों का भी ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य और जंगल एक-दूसरे से जुड़े हैं। विकास तभी सार्थक होगा, जब जंगल, जैव विविधता, नदियां और पर्यावरण सुरक्षित रहेंगे।
प्रमुख सचिव वन राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री की इच्छाशक्ति से वन विभाग के 4,506 अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति मिली है। प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र का 30.72 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है। यहां 9 टाइगर रिजर्व और 26 वन्यजीव अभयारण्य हैं। प्रदेश में चीता परियोजना, गज रक्षक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली, वन मानचित्रों का उपयोग और अन्य आधुनिक तकनीक आधारित कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एक पेड़ मां के नाम योजना के तहत इस वर्ष अब तक मध्यप्रदेश में 5 करोड़ 62 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। 43 जिलों में 94 वन वाटिकाओं को स्वीकृति मिली है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को भी लगातार राशि का वितरण किया जा रहा है।
समारोह में पदोन्नत वन अधिकारियों-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पदोन्नति से विभागीय कर्मचारियों में उत्साह और कार्य के प्रति नई ऊर्जा आई है। कार्यक्रम के अंत में वन विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। समारोह में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पदोन्नत अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।















