चेन्नई, 24 अगस्त।
तमिलनाडु में परंदूर हवाई अड्डा परियोजना को रद्द करने के फैसले पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने थलपति विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि नए स्थान पर हवाई अड्डे की परियोजना शुरू करने से चेन्नई के दूसरे हवाई अड्डे के निर्माण में कम से कम 10 साल की देरी हो सकती है।
अन्नामलाई ने कहा कि राज्य सरकार यदि किसी नए स्थान पर परियोजना आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है, तब भी हवाई अड्डे के निर्माण और संचालन में लंबा समय लगेगा। नए स्थल का चयन, केंद्र सरकार और वैधानिक संस्थाओं से मंजूरी, निविदा प्रक्रिया, भूमि अधिग्रहण और जरूरी लाइसेंस हासिल करने जैसी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। उनके अनुसार इन सभी चरणों में कम से कम एक दशक लग सकता है।
उन्होंने राज्य सरकार से वैकल्पिक स्थल की पहचान जल्द करने का आग्रह किया। अन्नामलाई ने चेन्नई हवाई अड्डे की मौजूदा क्षमता और बुनियादी ढांचे की सीमाओं का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चेन्नई कभी दक्षिण भारत का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता था, लेकिन वर्तमान में कुल यात्री संचालन क्षमता के मामले में यह पांचवें स्थान पर है।
अन्नामलाई के अनुसार मौजूदा हवाई अड्डे के पास सीमित भूमि क्षेत्र है। इसके अलावा टैक्सीवे और एयरोब्रिज की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण इसे कोड एफ श्रेणी में शामिल नहीं किया जा सकता। इससे ए-380 जैसे बड़े विमानों के संचालन में भी बाधा आती है।
उन्होंने कहा कि दूसरे हवाई अड्डे के निर्माण में देरी का तमिलनाडु को बड़ा नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि देश के दूसरे राज्य अपने विमानन ढांचे का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में परियोजना को टालने से राज्य विकास और विमानन क्षेत्र में पीछे रह सकता है।
अन्नामलाई ने सरकार से यह भी पूछा कि परंदूर परियोजना के लिए पहले ही अधिग्रहित करीब 1,700 एकड़ जमीन का अब क्या किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए कुल 5,746 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई थी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल और सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन लंबे समय के फैसलों का असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि दो दशक बाद जब तमिलनाडु के लोग पीछे मुड़कर देखेंगे तो उन्हें यह महसूस नहीं होना चाहिए कि भविष्य को ध्यान में रखकर समय पर फैसला नहीं लिया गया। उनके मुताबिक राज्य को ऐसी विमानन व्यवस्था चाहिए जो आने वाले वर्षों की जरूरतों को पूरा कर सके।
इस मुद्दे पर डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने परंदूर परियोजना रद्द किए जाने को तमिलनाडु के विकास के लिए अपूरणीय झटका बताया। स्टालिन ने सामाजिक मंच पर कहा कि परियोजना रद्द करना केवल बदलाव नहीं है, बल्कि इससे राज्य के विकास को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के हितों को राजनीतिक स्वार्थों के लिए दांव पर नहीं लगाया जा सकता।















