बेलग्रेड, 24 अगस्त।
सर्बिया में भीषण गर्मी और सूखे के बीच जंगलों में लगी आग पर काबू पाने के लिए यूरोपीय संघ के देशों की टीमें और रूस का एक विमान मदद कर रहे हैं। बेलग्रेड के पास स्थित संरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र डेलिब्लात्स्का पेस्कार में कई सप्ताह से आग जल रही है।
चेक गणराज्य और रोमानिया के दल सर्बियाई दमकलकर्मियों के साथ आग बुझाने में जुटे हैं। सोमवार को भी अभियान जारी रहा। दक्षिण-पश्चिमी स्तोलोवी पर्वतीय क्षेत्र में लगी एक अन्य आग पर भी काबू पा लिया गया है।
आग बुझाने के अभियान में रूस के इल्युशिन आईएल-76 जलवर्षक विमान का इस्तेमाल किया गया। दोनों स्थानों पर विमान के जरिए कुल 168 टन पानी गिराया गया, जिसमें डेलिब्लात्स्का पेस्कार में 126 टन और स्तोलोवी में 42 टन पानी डाला गया।
सर्बिया के आंतरिक मंत्री इवित्सा डाचिच ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। हर दिन 400 से अधिक कर्मी आग प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं।
सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने कहा कि देश के अपने संसाधन पर्याप्त नहीं रहने पर यूरोपीय संघ और रूस से तत्काल सहायता मांगी गई। सर्बिया यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, लेकिन वह संघ की नागरिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत आपदा के समय मदद मांग सकता है।
यूरोपीय सहायता के तहत रोमानिया, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य से चार ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भेजे गए हैं। जर्मनी और रोमानिया से दमकलकर्मियों की टीमें और वाहन भी अभियान में शामिल हैं।
इस गर्मी में सर्बिया ने भी यूरोप की मदद की थी। जंगलों की आग के दौरान सर्बिया ने स्पेन में एक अग्निशमन हेलीकॉप्टर और बचाव दल भेजा था।
पड़ोसी उत्तर मैसेडोनिया में भी आग लगी हुई है। स्त्रुमित्सा शहर के पास लगी आग से कम से कम एक मकान को नुकसान पहुंचने की सूचना है।
बाल्कन क्षेत्र में इस वर्ष जंगलों की आग का प्रकोप असामान्य रूप से गर्म और शुष्क मौसम के कारण बढ़ा है। तेज हवाओं ने कई जगह आग बुझाने के लिए लगाए गए विमानों और हेलीकॉप्टरों के अभियान को भी मुश्किल बनाया।
बोस्निया और क्रोएशिया की सीमा के पास सप्ताहांत में लगी बड़ी आग के कारण त्रेबिन्ये से क्रोएशिया के पर्यटन शहर डुब्रोवनिक को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बंद करनी पड़ी। इससे हजारों यात्री फंस गए और आसपास के गांवों को खाली कराया गया।
आग पर नियंत्रण के लिए क्रोएशिया के दमकलकर्मी भी सीमा पार पहुंचे हैं। करीब 16 किलोमीटर क्षेत्र में फैली आग को कठिन भूभाग के कारण नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।















